बिहार के अस्पतालों में फार्मासिस्ट भर्ती पर बढ़ा विवाद, आमने-सामने आए बी-फार्म और डी-फार्म के छात्र

बिहार के सरकारी अस्पतालों में 2473 फार्मासिस्ट पदों पर बहाली की योग्यता को लेकर विवाद गहरा गया है। गर्दनीबाग में बी-फार्म छात्रों के अनिश्चितकालीन अनशन के खिलाफ डिप्लोमा फार्मासिस्ट संघ ने मोर्चा खोलते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 7 October 2026, 10:37 AM IST

Patna: बिहार के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवा बांटने वाले फार्मासिस्टों की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर गहरे विवादों में घिर गई है। राज्य में बी-फार्म (डिग्री) और डी-फार्म (डिप्लोमा) धारकों के बीच योग्यता की शर्त को लेकर जंग छिड़ गई है।

एक तरफ जहां बी-फार्म अभ्यर्थी अपनी अनदेखी का आरोप लगाकर पटना के गर्दनीबाग में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं, वहीं दूसरी तरफ डिप्लोमा फार्मासिस्ट संघ ने इस आंदोलन को अदालत के आदेशों की अवमानना बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

अनिश्चितकालीन अनशन: 25 हजार बी-फार्म अभ्यर्थियों का दावा

धरनास्थल पर अनशन का नेतृत्व कर रहे अर्जेश राज, दिव्यांशु राज और उनके साथियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2024 की नियमावली संशोधन से करीब 25 हजार बी-फार्म डिग्रीधारी इस प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं।

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अभ्यर्थियों का आरोप है कि राज्य सरकार केंद्रीय भर्ती-पदोन्नति एवं सेवा विनियम-2025 को लागू नहीं कर रही है, जिसके चलते पूर्व में निकाली गई 2473 भर्तियों में से 1600 पद खाली रह गए थे। उनकी मांग है कि रेलवे और अन्य राज्यों की तर्ज पर बी-फार्म धारकों को भी अस्पतालों में फार्मासिस्ट पद पर आवेदन का मौका दिया जाए।

डिप्लोमा संघ का पलटवार: कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

दूसरी ओर, डिप्लोमा फार्मासिस्ट ऑर्गनाइजेशन छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार चौधरी ने आंदोलन पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और पुलिस प्रशासन को पत्र भेजकर अनशनकारियों पर कानूनी कार्रवाई की अपील की है।

संघ का कहना है कि पटना हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही बिहार सरकार की पुरानी नियमावली में डी-फार्म को ही निर्धारित योग्यता मानने के फैसले पर मुहर लगा चुके हैं।

सड़क पर उतरने की दी चेतावनी, फंसा बहाली का पेच

डिप्लोमा संगठन का तर्क है कि यदि बी-फार्म धारक अस्पताल फार्मासिस्ट पदों पर दावा कर रहे हैं, तो डिप्लोमा धारकों को भी बी-फार्म के लिए आरक्षित पदों जैसे ड्रग इंस्पेक्टर, गवर्नमेंट एनालिस्ट और टीचिंग में अवसर मिलना चाहिए।

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अगर सरकार ने आंदोलनकारियों के दबाव में नियम बदले, तो डिप्लोमा फार्मासिस्ट भी पूरे राज्य में सड़कों पर उतरेंगे। दोनों पक्षों की इस खींचतान के कारण स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर अनिश्चितता के भंवर में फंसती नजर आ रही है।

Location :  Patna

Published :  7 October 2026, 10:37 AM IST