
प्रतीकात्मक छवि (सोर्स- AI)
New Delhi: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को देश का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित सरकारी बैंक माना जाता है। देश के लाखों युवाओं के लिए एसबीआई में नौकरी पाना एक बड़े सपने के सच होने जैसा होता है, जिसे लोग 'लाइफ सेटल' होना कहते हैं। लेकिन इन दिनों इंटरनेट पर एसबीआई के एक बैंक मैनेजर की सैलरी स्लिप तेजी से वायरल हो रही है, जिसने इस सरकारी नौकरी की चकाचौंध के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है। वायरल दस्तावेज के अनुसार, मैनेजर की सालाना ग्रॉस सैलरी 35 लाख रुपये से अधिक दिखाई गई है, लेकिन जब इस रकम के पीछे का असल गणित सामने आया, तो हर कोई हैरान रह गया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पूजा (@poojaofficial5) नाम की एक यूजर ने इस सैलरी स्लिप का पूरा ब्योरा साझा किया है। वायरल हुए वित्त वर्ष 2025-26 के फॉर्म-16 के अनुसार, इस अधिकारी की बिल्कुल सटीक ग्रॉस सैलरी 35 लाख 24 हजार 315 रुपये दर्ज है।
गणित के हिसाब से अगर इस पूरी रकम को 12 महीनों से भाग दिया जाए, तो प्रति माह की सैलरी लगभग 2 लाख 93 हजार रुपये बनती है। सामान्य तौर पर कोई भी व्यक्ति यही सोचेगा कि मैनेजर के खाते में हर महीने करीब तीन लाख रुपये आ रहे हैं, लेकिन वास्तविकता इससे कोसों दूर है।
चलती ट्रेन की AC बोगी बनी ‘हनीमून सुइट’! एक तस्वीर वायरल हुई और रेलवे अफसर पर गिर गई गाज
एक्स यूजर पूजा ने पोस्ट में समझाया है कि अक्सर आम जनता सरकारी बैंक के अफसरों की भारी-भरकम ग्रॉस सैलरी देखकर उनकी वास्तविक कमाई का गलत अंदाजा लगा लेती है। इस 35 लाख रुपये की ग्रॉस सैलरी में कई ऐसे भत्ते और भुगतान शामिल हैं, जो हर महीने नहीं मिलते।
उदाहरण के लिए, इसमें 3 लाख 6 हजार रुपये का एलएफसी (LFC) एन्कैशमेंट और 26,528 रुपये का लीव एन्कैशमेंट शामिल है। ये लाभ हर महीने मिलने वाली सैलरी का हिस्सा नहीं होते, बल्कि चार साल में महज एक बार मिलने वाला प्रॉफिट हैं।
People often say that SBI employees have a "settled life"
but this Scale 3 Manager's salary slip might completely change your perspective.
Eight years ago, a young man joined State Bank of India as a Probationary Officer.
Today, he is a Scale 3 Manager,
and his Form 16 for FY… pic.twitter.com/Iy7TJOkUJI— Pooja (@poojaofficial5) July 5, 2026
इसके अलावा, बची हुई रकम में से हर महीने एक बड़ा हिस्सा टैक्स और लोन की रिकवरी में चला जाता है। बैंक अधिकारी की सैलरी से हर महीने भारी-भरकम इनकम टैक्स, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), और एंप्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) की कटौती होती है।
इतना ही नहीं, ज्यादातर बैंक अधिकारी होम लोन, कार लोन और टू-व्हीलर लोन जैसी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं, जिनकी मासिक किस्तें (EMI) सीधे उनकी सैलरी से ही काट ली जाती हैं। यही मुख्य कारण है कि फॉर्म-16 की ग्रॉस सैलरी और हर महीने बैंक अकाउंट में आने वाली 'टेक-होम' या 'इन-हैंड' सैलरी में जमीन-आसमान का अंतर आ जाता है।
आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद 55 हजार का सौदा…भोली सूरत देखकर संभल का शाहरुख हुआ दीवाना… !
इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर बैंकिंग सेक्टर के कर्मचारियों और आम जनता के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। वायरल पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, "फॉर्म-16 समाज में सिर्फ गर्व दिखाने के लिए अच्छा है, लेकिन महीने की वास्तविक इन-हैंड सैलरी बैंक कर्मचारियों का असली संघर्ष दिखाती है।"
वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि किसी की भी आय का सही आकलन उसकी ग्रॉस सैलरी से नहीं, बल्कि उसकी जेब में आने वाले पैसे और उसकी पारिवारिक जिम्मेदारियों से होना चाहिए। अधिकांश लोगों का यही मानना है कि टेक-होम सैलरी ही किसी भी कर्मचारी की असल कमाई की सच्ची कहानी बयां करती है।
Location : New Delhi
Published : 9 July 2026, 2:27 PM IST