
अनोखे पैरेंटिंग रूल्स (Img- Pinterest)
New Delhi: समाज में हर मां यही चाहती है कि लोग उसकी परवरिश की तारीफ करें और उसे एक आदर्श मां का दर्जा दें। लेकिन सोशल मीडिया पर दीक्षा नाम की एक डिजिटल क्रिएटर ने खुद को 'बुरी मां' घोषित करके एक नई बहस छेड़ दी है।
दीक्षा का कहना है कि वे अपने बच्चे की सेहत और सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त हैं। इसी वजह से रिश्तेदार और समाज के लोग उन्हें एक 'अनोखी और बुरी मां' के तौर पर देखने लगे हैं, जबकि उनका मानना है कि वे केवल अपने बच्चे का उज्ज्वल और सेहतमंद भविष्य गढ़ रही हैं।
दीक्षा ने अपने वायरल वीडियो में उन नियमों का खुलासा किया, जो वे अपनी बेटी के लिए मानती हैं। उन्होंने अपनी बेटी को शुरुआती 1 साल तक नमक और 2 साल तक किसी भी रूप में प्रोसेस्ड चीनी (Sugar) नहीं दी।
इतना ही नहीं, वे अपनी बेटी को मोबाइल, टीवी या आईपैड से पूरी तरह दूर रखकर सिर्फ किताबों और खिलौनों से खेलने देती हैं। हद तो तब हो जाती है जब वे अपनी बच्ची को दादी-नानी के हाथ के बने मीठे (चीनी वाले) पराठे तक खाने नहीं देतीं और उसकी जगह घर पर बना न्यूट्रिशियस बेबी फूड देती हैं।
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दीक्षा के नियम सिर्फ खाने-पीने और स्क्रीन टाइम तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने अपनी बच्ची की पर्सनल बाउंड्री और सुरक्षा को लेकर भी सख्त हिदायत तय की है। उनका नियम है कि परिवार के बेहद करीबी लोगों के अलावा कोई भी अनजान व्यक्ति उनकी अनुमति के बिना बच्ची को छू नहीं सकता और न ही कोई उसे किस (Kiss) कर सकता है। उनका मानना है कि बच्चों को बचपन से ही गुड टच और बैड टच के प्रति जागरूक करना और उनकी सेफ्टी का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
भले ही लोग दीक्षा के इन कड़े नियमों पर सवाल उठा रहे हों, लेकिन मेडिकल साइंस उनकी इस सोच का पुरजोर समर्थन करती है। मशहूर 'क्लीवलैंड क्लिनिक' और 'अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA)' की रिपोर्ट के मुताबिक, 2 साल से कम उम्र के बच्चों को अतिरिक्त चीनी देना उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।
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कम उम्र में चीनी देने से भविष्य में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, दांतों में सड़न और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में दीक्षा के ये कड़े नियम एक 'बुरी मां' की निशानी नहीं, बल्कि एक जागरूक और जिम्मेदार अभिभावक की पहचान हैं।
Location : New Delhi
Published : 24 August 2026, 2:33 PM IST