मेरठ में कुत्ते की तेरहवीं, हवन से लेकर प्रसाद तक इंसानों जैसी विदाई, बेटी के लिए डॉगी भाई था टफ्फू

मेरठ में 12 साल तक परिवार का हिस्सा रहे टफ्फू की मौत के बाद परिवार ने इंसानों की तरह उसकी तेरहवीं की। हवन हुआ, रिश्तेदारों को बुलाया गया और उसकी पसंद के बूंदी के लड्डू प्रसाद में बांटे गए।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 13 September 2026, 5:55 PM IST

Meerut News: किसी परिवार के लिए पालतू जानवर सिर्फ घर की रखवाली करने वाला नहीं, बल्कि परिवार का एक ऐसा सदस्य भी हो सकता है, जिसकी मौजूदगी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाए। मेरठ में ऐसी ही एक भावुक कहानी सामने आई है। यहां एक परिवार ने अपने पालतू देसी नस्ल के कुत्ते टफ्फू की मौत के बाद उसे इंसानों की तरह अंतिम विदाई दी। उसकी मौत के गम में तीन दिन तक घर में खाना नहीं बना और रविवार को परिवार ने टफ्फू की तेरहवीं का आयोजन किया।

12 साल पहले घर आया था टफ्फू

मूलरूप से रायबरेली के रहने वाले सुनील यादव पिछले 16 साल से मेरठ में रह रहे हैं। वह डीएन इंटर कॉलेज में माली हैं। परिवार में पत्नी सुनीता, बेटी वर्षा और बेटा शिवम हैं। करीब 12 साल पहले टफ्फू उनके घर आया था। धीरे-धीरे टफ्फू परिवार का अभिन्न हिस्सा बन गया। वह घर के हर सदस्य की आवाज पहचानता था। कौन अपना है और कौन बाहर का, इसकी भी उसे पहचान थी। परिवार के मुताबिक, घर में किसी का जन्मदिन हो या कोई दूसरा खुशी का मौका, टफ्फू भी उसका हिस्सा बनता था।

बेटी वर्षा के लिए था भाई जैसा

सुनील की बेटी वर्षा टफ्फू को अपना भाई मानती थीं। वह पिछले 12 साल से हर रक्षाबंधन पर उसे राखी बांधती थीं। वर्षा के मुताबिक, उसका एक भाई शिवम है और दूसरा टफ्फू था। शिवम के लिए भी टफ्फू बचपन का साथी था। दोनों ने करीब 12 साल एक-दूसरे के साथ बिताए। परिवार के किसी सदस्य के घर आने पर टफ्फू की अलग प्रतिक्रिया होती थी और वह सभी को पहचानता था।

अचानक बिगड़ी तबीयत, नहीं बच सका

सुनील के मुताबिक, शुक्रवार को अचानक टफ्फू की तबीयत खराब हो गई। परिवार उसे डॉक्टर के पास लेकर गया। शाम को डॉक्टर को दोबारा घर आना था, लेकिन इससे पहले ही टफ्फू की मौत हो गई। टफ्फू के जाने के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। सुनीता यादव के मुताबिक, वह तीन दिन से ठीक से सो नहीं पा रही हैं। घर का वह हिस्सा, जहां टफ्फू अक्सर रहता था, अब उसकी याद दिलाता है।

तेरहवीं में बनवाए टफ्फू के पसंदीदा लड्डू

रविवार को परिवार ने टफ्फू की तेरहवीं का आयोजन किया। रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को बुलाया गया। सुबह हवन कराया गया और प्रसाद बांटा गया। तेरहवीं के लिए आलू और सीताफल की सब्जी, रायता, कचौरी और बूंदी के लड्डू बनवाए गए। परिवार के मुताबिक, टफ्फू को बूंदी के लड्डू बेहद पसंद थे, इसलिए उसकी पसंदीदा मिठाई को भी प्रसाद में शामिल किया गया। कार्यक्रम में टफ्फू की तस्वीर लगाई गई थी। परिवार और रिश्तेदारों ने हवन में शामिल होकर उसे याद किया। सुनीता कहती हैं कि टफ्फू उनके घर का अभिन्न हिस्सा था। अब उसके जाने के बाद उसकी कमी हर दिन महसूस हो रही है।

Location :  Meerut

Published :  13 September 2026, 5:55 PM IST