‘कैब नहीं मिल रही, WFH दे दो’, बॉस का दोतुका जवाब- लेट आओ पर ऑफिस आओ; इंटरनेट पर छिड़ी बहस

भारी बारिश में कैब न मिलने पर कर्मचारी ने मांगा WFH, तो बॉस ने कहा- लेट आओ पर ऑफिस आओ। रेडिट पर वायरल हुई चैट ने खोला कॉर्पोरेट कल्चर में 'फेवरेटिज्म' और भेदभाव का कच्चा चिट्ठा। यूजर्स बोले- 'पूछो मत, सीधे बताओ!'

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 8 August 2026, 3:50 PM IST

New Delhi: कॉर्पोरेट दफ्तरों में कर्मचारियों की सहूलियत से ज्यादा मैनेजर की मर्जी भारी पड़ती है, और इसका ताजा उदाहरण सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक चैट ने साबित कर दिया है। भारी बारिश के दौरान कैब न मिलने से परेशान एक कर्मचारी ने जब अपने बॉस से वर्क फ्रॉम होम (WFH) की गुजारिश की, तो बॉस ने राहत देने के बजाय सीधे-सीधे फरमान सुना दिया, "चाहे जितना लेट आओ, लेकिन ऑफिस तो आना ही पड़ेगा।" इस घटना के सामने आते ही इंटरनेट पर कॉर्पोरेट कल्चर में जारी दोगलेपन को लेकर बहस छिड़ गई है।

एक ही मैनेजर, एक ही रोल... लेकिन नियम अलग-अलग!

Reddit के r/IndianWorkplace फोरम पर अपनी आपबीती साझा करते हुए पीड़ित कर्मचारी ने बताया कि बारिश के कारण वह आधे घंटे से Uber बुक करने की कोशिश कर रहा था। जब कोई कैब नहीं मिली, तो उसने मैनेजर से पूछा कि क्या वह WFH कर सकता है? मैनेजर ने उसकी मजबूरी समझने के बजाय कहा कि देरी से आना चलेगा, पर आना अनिवार्य है।

विडंबना यह रही कि उसी प्रोजेक्ट और उसी रोल में काम करने वाले उसके अन्य साथियों को मैनेजर ने आसानी से WFH दे दिया था। कर्मचारी ने आरोप लगाया कि मैनेजर अपने पसंदीदा सहकर्मियों के साथ अलग और बाकी कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करते हैं।

मिर्जापुर के राजगढ़ थाने में ऑडियो कांड से हड़कंप! वायरल क्लिप के बाद मुख्य आरक्षी सस्पेंड, अब जांच में किस-किस की गर्दन फंसेगी?

'इजाजत मांगो मत, सीधे सूचना दो'

इस वायरल चैट पर इंटरनेट यूजर्स की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई अनुभवी कॉर्पोरेट कर्मचारियों ने पीड़ित को सलाह देते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बॉस से "इजाजत मांगने" के बजाय सीधे "सूचना देना" सीखें।

एक यूजर ने लिखा, "लोग घटिया कंपनियों की वजह से नहीं, बल्कि घटिया मैनेजर्स के पक्षपाती रवैये की वजह से नौकरियां छोड़ते हैं।" वहीं दूसरे यूजर ने कहा, "गलती आपकी भी है कि आपने उन्हें मना करने का विकल्प दिया। अगर आप सीधे कहते कि बारिश की वजह से आज WFH कर रहा हूं, तो उनके पास इनकार करने का मौका ही नहीं होता।"

स्मार्टफोन देखते ही उल्टे पांव भागे बच्चे! कुशीनगर में टीचर्स का अनोखा नाटक हुआ वायरल, छूने से भी कतरा रहे नन्हे-मुन्ने

टॉक्सिक मैनेजमेंट पर उठते गंभीर सवाल

यह मामला सिर्फ एक कर्मचारी का नहीं, बल्कि देश के लाखों कॉर्पोरेट कर्मचारियों की उस पीड़ा को दर्शाता है जहाँ एक ही टीम में दोहरे मापदंड (Double Standards) लागू किए जाते हैं। कर्मचारी सुरक्षा और व्यावहारिक दिक्कतों से ऊपर जब मैनेजरों का अहम आ जाता है, तो दफ्तर का माहौल दमघोंटू हो जाता है।

Location :  New Delhi

Published :  8 August 2026, 3:50 PM IST