‘एक कचौड़ी दो समोसा, मर्द जात का क्या भरोसा’ का क्या है सही मतलब, दिल्ली की लड़कियों ने बताया पूरा सच

दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में ‘एक कचौड़ी, दो समोसा-मर्द जात का क्या भरोसा’ नारा फिर सुनाई दिया। डाइनामाइट न्यूज़ ने प्रदर्शन में शामिल Gen-Z लड़कियों से बात की और जाना कि आखिर इस नारे का मतलब क्या है और महिलाएं इसे प्रोटेस्ट में क्यों इस्तेमाल कर रही हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 2 October 2026, 6:31 PM IST


New Delhi: दिल्ली में कुछ दिनों पहले महिलाओं ने प्रोटेस्ट किया था, जिसमें नारे लगाए गए थे कि ‘एक कचौड़ी दो समोसा, मर्द जात का क्या भरोसा’। इसको लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में एक बार फिर सवाल खड़ा हुआ। दरअसल, अभिजीत दीपके के ऐलान पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर प्रोटेस्ट जंतर-मंतर पर हुआ। जिसमें काफी संख्या में gen-z भी मौजूद रहे। इस दौरान डाइनामाइट न्यूज़ की टीम ने उन लड़कियों से बातचीत की, जो महिलाओं के प्रोटेस्ट के बाद अब ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे प्रोटेस्ट में शामिल हुई हैं। उन्होंने बताया कि आखिर क्यों ‘एक कचौड़ी दो समोसा, मर्द जात का क्या भरोसा’ के नारे लगाए गए।

Location :  New Delhi

Published :  2 October 2026, 6:21 PM IST