उत्तराखंड में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी ने हल्द्वानी, नैनीताल और रामनगर में शादी–समारोहों की तैयारियों को रोक दिया है। कैटरिंग रेट बढ़ने, बुकिंग रद्द होने और लकड़ी के चूल्हों पर लौटने से अप्रैल–मई का विवाह सीजन गहरे संकट में दिख रहा है। इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक बढ़ने से बाजारों में स्टॉक तक खत्म हो गया है।

शादी वाले घरों की बढ़ी टेंशन
Nainital: शादी का मौसम आम तौर पर खुशियों, तैयारियों और रौनक से भरा होता है, लेकिन इस बार जिले में एक अलग तरह की परेशानी लोगों के सामने खड़ी हो गई है। कमर्शियल गैस सिलिंडरों की अचानक कमी ने पूरे जिले में विवाह समारोहों की तैयारियों को प्रभावित कर दिया है। मार्च तक चल रहे मौजूदा शादी सीजन में तो लोग किसी तरह जुगाड़ करके कार्यक्रम निपटा रहे हैं, लेकिन 15 अप्रैल से शुरू होने वाला अगला विवाह दौर कई लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है। कैटरिंग संचालक से लेकर होटल और रिजॉर्ट मालिक तक इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं, जबकि शादी करने वाले परिवार भी असमंजस में हैं कि आने वाले दिनों में व्यवस्थाएं कैसे होंगी।
इस बार विवाह के शुभ मुहूर्त कम हैं, जिसकी वजह से कई जगहों पर एक ही दिन में बड़ी संख्या में शादियां आयोजित होने वाली हैं। ऐसे में गैस सिलिंडरों की कमी का असर और भी ज्यादा महसूस किया जा रहा है। कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि एक शादी में ही कई सिलिंडर की जरूरत पड़ती है। अगर एक ही दिन कई कार्यक्रम हो जाएं तो सिलिंडरों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। मौजूदा हालात में इतनी आपूर्ति संभव नहीं दिख रही, जिससे आने वाले सीजन को लेकर चिंता और गहरी हो गई है।
इस संकट का सबसे ज्यादा असर हल्द्वानी में देखा जा रहा है। यहां के कैटरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष हर्षवर्धन पांडे बताते हैं कि शहर में करीब 80 बैंक्वेट हॉल हैं और इसके अलावा बड़ी संख्या में शादी समारोह घरों में भी आयोजित होते हैं। इन सभी आयोजनों में खाना बनाने से लेकर बुफे में भोजन गर्म रखने तक लगभग हर काम कमर्शियल गैस पर ही निर्भर रहता है।
उनका कहना है कि लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाना संभव तो है, लेकिन बुफे में रखे व्यंजनों को लगातार गर्म रखना मुश्किल हो जाता है। इसके लिए इंडक्शन चूल्हों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे बिजली का खर्च काफी बढ़ जाता है।
गैस की कमी और बढ़ते खर्च का सीधा असर अब कैटरिंग के रेट पर पड़ने वाला है। कैटरिंग कारोबारियों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो उन्हें मजबूरी में प्रति प्लेट कीमत 100 से 150 रुपये तक बढ़ानी पड़ सकती है। इसका असर सीधे शादी करने वाले परिवारों के बजट पर पड़ेगा। कई कैटरर्स का कहना है कि बढ़ती लागत की वजह से उन्हें मेन्यू में भी कटौती करनी पड़ सकती है। यानी पहले जहां शादी में दर्जनों तरह के व्यंजन परोसे जाते थे, वहां अब कम विकल्प रखने पड़ सकते हैं।
नैनीताल में स्थिति और भी ज्यादा गंभीर होती जा रही है। यहां कई कैटरिंग संचालकों ने फिलहाल नई बुकिंग लेना ही बंद कर दिया है। उनका कहना है कि जब तक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक नए कार्यक्रम लेना जोखिम भरा है। कुछ कैटरर्स ने तो शादी वाले परिवारों से साफ कह दिया है कि अगर वे खुद गैस सिलिंडर की व्यवस्था कर पाते हैं तो ही वे कार्यक्रम कर पाएंगे। वरना आयोजन कराना मुश्किल हो जाएगा।
मल्लीताल क्षेत्र में भी गैस की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है। यहां कई कैटरिंग संचालकों को अपनी बुकिंग रद्द करनी पड़ रही है। इतना ही नहीं, सिलिंडर नहीं मिलने के कारण शहर के चार रेस्टोरेंट भी अस्थायी रूप से बंद करने पड़े हैं। इससे स्थानीय व्यापार पर भी असर पड़ा है और शहर के कारोबारियों में चिंता का माहौल बन गया है। पर्यटन क्षेत्र होने के कारण यहां होटल और रेस्टोरेंट का कारोबार काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए प्रसिद्ध रामनगर में भी हालात अलग नहीं हैं। यहां के कई होटल और रिजॉर्ट अब पुराने समय की तरह लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेने लगे हैं। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीमान सिंह बताते हैं कि बड़े आयोजनों में अब कई तरह के व्यंजन लकड़ी पर ही तैयार किए जा रहे हैं। उबालने वाले व्यंजन, तंदूरी डिश और फ्राई आइटम तक लकड़ी के चूल्हों पर बनाए जा रहे हैं। हालांकि लकड़ी पर खाना पकाने में ज्यादा समय और मेहनत लगती है, इसलिए कुछ व्यंजन मेन्यू से हटाने भी पड़े हैं।
गैस संकट के बीच इंडक्शन चूल्हों की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है। हल्द्वानी के बड़े इलेक्ट्रॉनिक स्टोरों में पहले जहां रोजाना दो या तीन इंडक्शन चूल्हे बिकते थे, वहीं अब बिक्री बढ़कर करीब 15 तक पहुंच गई है। कई दुकानों में तो स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी बड़े ब्रांडों के कई मॉडल आउट ऑफ स्टॉक दिख रहे हैं। रामनगर के व्यापारियों का कहना है कि दो किलोवॉट के इंडक्शन चूल्हों की कीमत करीब दो हजार रुपये से शुरू होती है, लेकिन मांग इतनी बढ़ गई है कि आपूर्ति करना मुश्किल हो रहा है।