क्या आपकी गैस एजेंसी भी आपके नाम पर सिलेंडर की कालाबाजारी कर रही है? विकासनगर में एक उपभोक्ता के साथ हुए फर्जीवाड़े ने खोली पोल। ऑनलाइन रिकॉर्ड में 20 सिलेंडर की डिलीवरी, सच्चाई कुछ और। पूरी खबर यहाँ पढ़ें…

विकासनगर गैस एजेंसी फर्जीवाड़ा (source:google)
Vikasnagar: उत्तराखंड के विकासनगर क्षेत्र में एक गैस एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं के हक पर डाका डालने और सरकारी सब्सिडी के साथ खिलवाड़ करने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। क्षेत्र के एक जागरूक उपभोक्ता ने डिजिटल साक्ष्यों के साथ एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बड़े स्तर पर धांधली होने का आरोप लगाया है।
पीड़ित उपभोक्ता का कहना है कि उन्होंने साल भर में जितने सिलेंडर वास्तव में लिए हैं, रिकॉर्ड में उससे कहीं अधिक की डिलीवरी दिखाई जा रही है। इस खुलासे के बाद क्षेत्र के अन्य उपभोक्ताओं में भी हड़कंप मचा हुआ है और एजेंसी की पारदर्शिता पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
पूरा मामला विकासनगर स्थित एक गैस एजेंसी से जुड़ा है, जहाँ उपभोक्ता रोहित धीमन ने वितरण प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ी को उजागर किया है। रोहित धीमन के अनुसार, नियमतः एक साल के भीतर एक घरेलू उपभोक्ता को 12 गैस सिलेंडर मिलने की तय प्रक्रिया है। उपभोक्ता ने बताया कि अपनी पारिवारिक आवश्यकता के अनुसार उन्होंने पिछले एक वर्ष में मात्र 8 से 10 सिलेंडरों की ही बुकिंग की और उन्हें प्राप्त किया। लेकिन जब उन्होंने अपने मोबाइल फोन पर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और डिलीवरी हिस्ट्री चेक की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
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मोबाइल ऐप और ऑनलाइन रिकॉर्ड यह दर्शा रहे थे कि उनके नाम पर अब तक 20 गैस सिलेंडर डिलीवर किए जा चुके हैं। उपभोक्ता ने मौके पर साक्ष्य दिखाते हुए स्पष्ट किया कि जब उन्होंने मात्र 10 सिलेंडर ही लिए, तो शेष 10 सिलेंडर आखिर किसकी मिलीभगत से और कहाँ सप्लाई कर दिए गए।
धांधली का शिकार हुए रोहित धीमन का आरोप है कि जब उन्होंने इस विसंगति के बारे में एजेंसी प्रबंधन से बात करनी चाही और अपना अगला सिलेंडर मांगा, तो उन्हें गैस देने से मना कर दिया गया। एजेंसी द्वारा अब उन्हें बार-बार केवाईसी अपडेट करवाने का दबाव बनाया जा रहा है।
पीड़ित का कहना है कि वह एक साधारण उपभोक्ता हैं और बार-बार एजेंसी के चक्कर काटकर अपना समय बर्बाद नहीं कर सकते। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके रिकॉर्ड में फर्जी तरीके से सिलेंडरों की संख्या बढ़ा दी गई, तो इसमें उपभोक्ता की क्या गलती है? केवाईसी के नाम पर एजेंसी अपनी कमियों को छिपाने और उपभोक्ता को परेशान करने का प्रयास कर रही है।
इस फर्जीवाड़े से आहत उपभोक्ता रोहित धीमन ने अब इस पूरे प्रकरण की शिकायत संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन से करने का मन बना लिया है। उनका कहना है कि यह केवल उनके अकेले का मामला नहीं हो सकता, बल्कि एजेंसी द्वारा कई अन्य मासूम उपभोक्ताओं के नाम पर भी इसी तरह सिलेंडरों की कालाबाजारी की जा रही होगी।
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उन्होंने मांग की है कि गैस एजेंसी के पिछले एक साल के स्टॉक और डिलीवरी रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की जाए ताकि यह पता चल सके कि कागजों में दिखाए गए अतिरिक्त सिलेंडर वास्तव में किसे बेचे गए हैं। इस घटना ने एक बार फिर गैस वितरण प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और डिजिटल रिकॉर्डिंग में होने वाली हेराफेरी की पोल खोल दी है।