नैनीताल हाई कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए पुलिस ने सघन जांच अभियान चलाया। सभी प्रवेश द्वारों पर फ्रिस्किंग, एंटी-सैबोटेज चेकिंग और सीसीटीवी मॉनिटरिंग बढ़ाई गई। एसएसपी ने सुरक्षा ऑडिट, श्रेणीवार प्रवेश व्यवस्था और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के निर्देश दिए।

Nainital: उत्तराखंड के नैनीताल में उच्च न्यायालय परिसर की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है। एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टी.सी. के निर्देश पर परिसर में आने-जाने वाले सभी व्यक्तियों की प्रभावी फ्रिस्किंग और एंटी-सैबोटेज चेकिंग की जा रही है। अधिवक्ताओं, वादकारियों और न्यायालय कर्मियों के लिए अलग-अलग श्रेणीवार सुरक्षा प्रबंध तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भीड़ नियंत्रण और पहचान सत्यापन व्यवस्थित ढंग से हो सके।
आज एसएसपी ने स्वयं हाई कोर्ट परिसर का निरीक्षण कर सभी प्रवेश द्वारों, बैरियर और तैनात पुलिस बल की व्यवस्था का विस्तृत जायजा लिया। उन्होंने सुरक्षा में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने के सख्त निर्देश दिए और हर आने-जाने वाले व्यक्ति की जांच सुनिश्चित करने को कहा।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए एसएसपी ने सुरक्षा ऑडिट टीम को उच्चीकृत सुरक्षा योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस योजना को बाद में उच्चाधिकारियों और शासन स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। परिसर में प्रभावी सीसीटीवी ग्रिड तैयार कर कैमरों की संख्या, कवरेज और मॉनिटरिंग सिस्टम को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।
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इसके साथ ही पुलिस ने क्विक रिएक्शन टीम (QRT), बम निरोधक दस्ता (BDS), फायर सर्विस, वायरलेस और चौकी पुलिस की तैनाती का आंकलन किया। आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त बल की तैनाती और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी चर्चा की गई।
हाई कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आयोजित गोष्ठी में एसपी नैनीताल डॉ. जगदीश चंद्र, एसपी संचार रेवाधर मठपाल, मुख्य सुरक्षा अधिकारी राकेश बिष्ट, सीओ रामनगर सुमित पांडे, मुख्य अग्निशमन अधिकारी गौरव किरार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। निरीक्षक अभिसूचना, पुलिस लाइन, दूरसंचार और पीएसी के अधिकारियों ने भी सुरक्षा संबंधी बिंदुओं पर अपने सुझाव रखे।
बैठक में सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और आपातकालीन स्थिति से निपटने की कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि नियमित मॉक ड्रिल, संदिग्ध वस्तुओं की जांच और प्रवेश नियंत्रण व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए।
पुलिस का कहना है कि न्यायालय परिसर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। नियमित निरीक्षण और तकनीकी निगरानी के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को लगातार अपडेट किया जाएगा।