केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर मुख्यमंत्री के बयान का तीर्थ पुरोहितों, केदारसभा सदस्यों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्वागत किया है। इसे हिंदू आस्था और धार्मिक परंपराओं की रक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।

मुख्यमंत्री के बयान के बाद धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया
Dehradun: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा देहरादून में दिए गए बयान, जिसमें उन्होंने हिंदू धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने की बात कही के बाद केदारनाथ धाम से जुड़े तीर्थ पुरोहितों और धार्मिक संगठनों ने इसका खुलकर स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह फैसला लंबे समय से चली आ रही मांग के अनुरूप है और इससे हिंदू आस्था की रक्षा होगी।
केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित एवं केदारसभा के सदस्य संतोष त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री के निर्णय को “पूरी तरह सही” बताया। उन्होंने कहा कि केदारनाथ और बद्रीनाथ जैसे पवित्र धामों की एक विशिष्ट धार्मिक मर्यादा है, जिसे बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे में सरकार का यह कदम आस्था के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है।
केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र की विधायक आशा नौटियाल पहले भी कई बार केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर बयान दे चुकी हैं। इस बार भी उन्होंने मुख्यमंत्री के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि केदारनाथ जैसे हिंदुओं के सर्वोच्च आस्था केंद्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
विधायक आशा नौटियाल ने जोर देते हुए कहा कि हिंदू समाज अन्य धर्मों के पवित्र स्थलों की मर्यादा का सम्मान करता है और वहां नहीं जाता, तो उसी तरह हिंदू धार्मिक स्थलों की पवित्रता भी बनाए रखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि धार्मिक परंपराओं की रक्षा का विषय है।
केदारनाथ धाम
गौरतलब है कि केदारघाटी के सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग लंबे समय से इस मुद्दे को उठाते आ रहे हैं। इससे पहले यह भी मांग की गई थी कि केदारनाथ यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु मुख्य पड़ाव पर पंचगव्य ग्रहण करने के बाद ही आगे की यात्रा करें, जिससे धार्मिक शुद्धता बनी रहे।
हालांकि, इस मुद्दे पर पर्यटन और प्रशासनिक स्तर पर संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। केदारनाथ देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में सरकार के लिए धार्मिक भावनाओं और संवैधानिक प्रावधानों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक होगा।
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अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री के बयान के बाद सरकार इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है। केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।