कैंची धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से पक्षियों पर बड़ा संकट, नैनीताल की पहाड़ियों से गायब हो रहे परिंदे

कैंची धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और बढ़ते प्रदूषण के कारण नैनीताल की पहाड़ियों में पक्षियों की मौजूदगी तेजी से घट रही है। पर्यावरण प्रेमियों ने इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की अपील की है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 October 2026, 12:22 PM IST

Nainital: उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम में इन दिनों भक्तों और पर्यटकों का सैलाब उमड़ रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की अनियंत्रित भीड़ ने जहां एक तरफ धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई दी है, वहीं दूसरी तरफ इस पहाड़ी क्षेत्र के पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए एक गंभीर संकट पैदा कर दिया है।

हालात यह हैं कि जंगलों और प्राकृतिक आवासों पर बढ़ते दबाव के कारण नैनीताल की इन खूबसूरत पहाड़ियों से कई प्रजातियों के पक्षी तेजी से गायब होने लगे हैं, जिसने प्रकृति प्रेमियों की नींद उड़ा दी है।

ध्वनि प्रदूषण और वाहनों की आवाजाही से उजड़ रहे आशियाने

विशेषज्ञों और स्थानीय पक्षी प्रेमियों का मानना है कि कैंची धाम और इसके आसपास के इलाकों (जैसे पंगारा की पहाड़ियां) में लगातार बढ़ती गाड़ियों की आवाजाही, भारी ट्रैफिक जाम और हॉर्न का शोर ने पक्षियों के शांत जीवन में खलल डाल दिया है।

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अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण और लगातार मानवीय हस्तक्षेप के कारण पक्षियों का प्राकृतिक आवास बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। परिंदों के लिए यह कोलाहल असहनीय होता जा रहा है, जिसके चलते वे अपने पुराने ठिकानों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरे की बड़ी घंटी

वन विभाग के अधिकारियों और पर्यावरणविदों ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इस पहाड़ी क्षेत्र का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) हमेशा के लिए तबाह हो सकता है।

पक्षियों की घटती संख्या इस बात का संकेत है कि पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। एक तरफ जहां धार्मिक आस्था और पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जिसकी अनदेखी भारी पड़ सकती है।

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जिम्मेदार पर्यटन और संतुलन बनाने की सख्त जरूरत

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक मजबूत संतुलन बनाने की आवश्यकता है। वन विभाग और प्रशासन को मिलकर पक्षियों की संख्या पर नियमित निगरानी रखनी होगी।

साथ ही, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए 'जिम्मेदार पर्यटन' (Responsible Tourism) के नियमों का कड़ाई से पालन कराना होगा, ताकि आस्था के इस महान केंद्र पर आने वाले लोग प्रकृति को नुकसान पहुँचाए बिना शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन कर सकें और हमारे पर्यावरण की जैव विविधता सुरक्षित रह सके।

Location :  Nainital

Published :  10 October 2026, 12:22 PM IST