नैनीताल की पहाड़ी पर बसा वो मंदिर, जहां जुड़ी हैं Neem Karoli Baba की कई मान्यताएं; पढ़ें रोचक कहानी

सरोवर नगरी की शांत पहाड़ियों के बीच बसा हनुमानगढ़ी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था और आध्यात्म का केंद्र माना जाता है। भगवान हनुमान को समर्पित यह पवित्र स्थान महान संत नीम करौली बाबा की साधना से जुड़ा हुआ है। समय के साथ यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं रहा…पढ़ें पूरी खबर

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 14 March 2026, 8:58 PM IST

Nainital: सरोवर नगरी की शांत पहाड़ियों के बीच बसा हनुमानगढ़ी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था और आध्यात्म का केंद्र माना जाता है। भगवान हनुमान को समर्पित यह पवित्र स्थान महान संत नीम करौली बाबा की साधना से जुड़ा हुआ है। समय के साथ यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं रहा, बल्कि बाबा के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ के रूप में स्थापित हो गया है। देश विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां माथा टेकने और आध्यात्मिक शांति पाने के लिए पहुंचते हैं।

क्या है पूरी खबर?

शहर की हलचल से दूर मिलता है आध्यात्मिक सुकून: हनुमानगढ़ी मंदिर नैनीताल नगर से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शहर की चहलपहल से अलग यह स्थान अपने शांत और दिव्य वातावरण के लिए जाना जाता है। यहां से हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। खासकर शाम के समय सूर्यास्त का नजारा इतना मनमोहक होता है कि श्रद्धालुओं के साथ साथ पर्यटक भी इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।

भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित

बाबा के आगमन से बदली इस स्थान की पहचान: स्थानीय लोगों के अनुसार संत नीम करौली बाबा लगभग सन 1950 के आसपास पहली बार इस स्थान पर पहुंचे थे। उस समय यह इलाका काफी सुनसान माना जाता था। बाबा ने अपने अनुयायियों के सहयोग से यहां एक छोटी सी कुटिया बनवाई और पास में भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित की। धीरे धीरे लोगों की आस्था बढ़ने लगी और यह स्थान भक्तों के लिए विशेष बन गया।

कुछ ही वर्षों में विकसित हुआ पूरा मंदिर परिसर

बाबा की प्रेरणा से यहां धार्मिक गतिविधियां बढ़ती गईं और बाद में इस स्थान को मंदिर के रूप में विकसित किया गया। सन् 1953 में यहां बड़े हनुमान मंदिर का निर्माण कराया गया। इसके बाद कुछ समय में भगवान राम का मंदिर भी बनाया गया और आगे चलकर शिव मंदिर का निर्माण हुआ। इस तरह यह स्थान एक विस्तृत धार्मिक परिसर के रूप में विकसित हो गया।

जिस जगह से लोग डरते थे, वही बना आस्था का केंद्र:

स्थानीय परंपराओं के मुताबिक जिस पहाड़ी पर आज हनुमानगढ़ी मंदिर स्थित है, वह कभी कब्रिस्तान के रूप में जानी जाती थी और लोग यहां आने से कतराते थे। कहा जाता है कि बाबा ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति और साधना से इस स्थान को पवित्र बना दिया। बाद में नैनीताल हल्द्वानी मार्ग के पास मनोरा क्षेत्र की पहाड़ी पर मंदिर का निर्माण कर इसे धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित किया गया।

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मंदिर से जुड़ी एक रहस्यमयी कथा 

हनुमानगढ़ी से जुड़ी कई लोककथाएं भी प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार, यहां बाबा ने एक बार भंडारे का आयोजन कराया था, जिसमें प्रसाद लेने कई बच्चे पहुंचे। कथा के मुताबिक प्रसाद ग्रहण करने के बाद वे अचानक दिखाई नहीं दिए। श्रद्धालु इसे आध्यात्मिक घटना मानते हैं और मान्यता है कि बाबा ने उन आत्माओं को मोक्ष प्रदान किया।

भविष्यवाणी से भी जोड़ा जाता है यह स्थान

स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच यह भी कहा जाता है कि हैड़ाखान बाबा ने कभी इस स्थान के बारे में भविष्यवाणी की थी कि यहां भगवान अंजनी के पुत्र की विशेष कृपा प्रकट होगी। भक्त मानते हैं कि बाद में नीम करौली बाबा के माध्यम से यह स्थान वास्तव में एक जागृत धाम के रूप में स्थापित हुआ।

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सिद्धि मां की साधना से भी जुड़ा संबंध 

नीम करौली बाबा की प्रमुख अनुयायियों में मानी जाने वाली सिद्धि मां का भी इस स्थल से गहरा नाता बताया जाता है। कहा जाता है कि उनके आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत भी इसी स्थान से हुई थी। आज मंदिर परिसर में उनका मंदिर भी मौजूद है, जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मंदिर तक पहुंचना बेहद आसान 

हनुमानगढ़ी तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग से आसानी से जाया जा सकता है। नैनीताल से हल्द्वानी की ओर जाने वाले मार्ग पर टैक्सी, कैब या सार्वजनिक परिवहन से यहां पहुंचा जा सकता है। कई श्रद्धालु तल्लीताल से पैदल मार्ग का उपयोग करते हुए भी मंदिर तक जाते हैं और रास्ते में प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हैं।

 

Location : 
  • Nainital

Published : 
  • 14 March 2026, 8:58 PM IST