
राजधानी दिल्ली की गूंज से सहमा देहरादून (Img- AI)
Dehradun: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत के ताश के पत्तों की तरह ढहने और 6 बेकसूरों की मौत के भयावह मंजर ने पहाड़ों की गोद में बसे देहरादून की भी नींद उड़ा दी है। इस हादसे के तुरंत बाद दून प्रशासन और नगर निगम में हड़कंप मच गया है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच दून में बरसों पुराने और जर्जर हो चुके मकान अब सीधे तौर पर सीधे मौत को दावत दे रहे हैं।
नगर निगम के सर्वे में शहर भर में 21 अति-संवेदनशील व 'गिरासू' इमारतों की पहचान की गई है। प्रशासनिक सख्ती के बाद हालांकि 7 इमारतों को खाली करा लिया गया है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 8 इमारतों में अब भी लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं।
इसके अलावा 6 इमारतों का विवाद अदालत में लंबित होने के कारण प्रशासन का हाथ बंधा हुआ है। कार्यकारी अभियंता रजित कोटियाल के मुताबिक, सभी भवन स्वामियों और किरायेदारों को कड़े नोटिस जारी कर तुरंत जगह खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
75 बिस्तर, 5 मंजिल और जीरो सेफ्टी: सत्य निकेतन हादसे ने खोली नगर निगम के निगरानी तंत्र की पोल
जर्जर मकानों का यह जाल शहर के केंद्र से लेकर प्रमुख व्यावसायिक और आवासीय इलाकों तक फैला हुआ है। आढ़त बाजार, तिलक रोड, गांधी रोड, मोती बाजार, कौलागढ़ रोड, चकराता रोड की एलआईसी बिल्डिंग और मोहब्बेवाला इंडस्ट्रियल एरिया जैसे घने इलाकों में ये जर्जर ढांचे कभी भी बड़े हादसे में तब्दील हो सकते हैं।
खतरा केवल जर्जर दीवारों तक सीमित नहीं है। काठबंगला, सपेरा बस्ती और चूना भट्ठा जैसे नदी-नालों के मुहाने पर बसे इलाकों में हालात और अधिक संवेदनशील हैं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और नगर आयुक्त आलोक पांडेय ने टीमों को अलर्ट पर रखा है। फिर भी सवाल यही है कि क्या लोग समय रहते अपनी जिद छोड़ेंगे या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन चेतेगा?
Location : Dehradun
Published : 7 September 2026, 10:22 AM IST