नोएडा के सेक्टर-150 में निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद नोएडा अथॉरिटी ने कड़ा कदम उठाया है। एक जूनियर इंजीनियर को नौकरी से हटाया गया है और कई अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी हुए हैं।

Engineer का फाइल फोटो
Noida: नोएडा की चमचमाती सड़कों और ऊंची इमारतों के बीच एक ऐसी लापरवाही सामने आई है, जिसने सिस्टम की नींद और सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी। अंधेरी रात, घना कोहरा और बिना बैरिकेडिंग का निर्माणाधीन मॉल…इसी खतरनाक चूक ने एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान ले ली। अब इस मौत ने प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है और नोएडा प्राधिकरण की सख्ती पहली बार खुलकर सामने आई है।
निर्माणाधीन मॉल में डूबकर मौत, मचा हड़कंप
नोएडा के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र स्थित सेक्टर-150 में निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में डूबकर 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। हादसे के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया और प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे। लोगों का कहना है कि अगर निर्माण स्थल पर सुरक्षा के न्यूनतम इंतजाम होते तो यह हादसा टल सकता था।
नोएडा अथॉरिटी का एक्शन, जूनियर इंजीनियर सस्पेंड
मामले के बढ़ते दबाव के बीच नोएडा प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई की है। देर रात जारी प्रेस नोट में बताया गया कि सेक्टर-150 और उसके आसपास यातायात से जुड़े कार्यों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। वहीं नोएडा ट्रैफिक सेल में तैनात जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। यह कार्रवाई सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही की स्वीकारोक्ति मानी जा रही है।
CEO का सख्त रुख, रिपोर्ट तलब
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम. ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने लोटस बिल्डर के आवंटन और निर्माण कार्य से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट संबंधित विभागों से तलब की है। साथ ही साफ कहा है कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
री-इंस्पेक्शन के आदेश, आगे भी कार्रवाई
सीईओ ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में चल रही निर्माणाधीन परियोजनाओं की दोबारा जांच की जाए। मकसद साफ है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्राधिकरण का कहना है कि दोषियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
कैसे हुआ हादसा, जानिए पूरा मामला
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता, जो टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहते थे और गुरुग्राम की एक कंपनी में काम करते थे, शनिवार तड़के काम से घर लौट रहे थे। घने कोहरे के बीच उनकी कार सेक्टर-150 में निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट के लिए खोदे गए 20 फीट से ज्यादा गहरे, पानी से भरे गड्ढे में गिर गई। फायर डिपार्टमेंट, SDRF, NDRF और पुलिस की टीमों के लंबे सर्च ऑपरेशन के बाद शव बरामद हुआ।
लापरवाही के आरोप, FIR दर्ज
चश्मदीदों और स्थानीय लोगों ने बचाव कार्य में देरी और अपर्याप्त बैरिकेडिंग का आरोप लगाया। विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने पीड़ित परिवार की शिकायत पर दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। हालांकि प्रशासन ने बचाव अभियान में लापरवाही से इनकार किया है।