उत्तर प्रदेश के मथुरा में ‘फरसा वाले बाबा’ चंद्रशेखर दास की मौत के बाद माहौल अचानक भड़क उठा। दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे पर समर्थकों ने जाम और हिंसक प्रदर्शन किया, जिसमें 23 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। जबकि पूरे मामले में साजिश, हादसा और हिंसा तीनों एंगल पर जांच तेज कर दी गई है।

बाबा का फाइल फोटो
Mathura: मथुरा में ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से पहचाने जाने वाले चंद्रशेखर दास की मौत के बाद हालात ऐसे बिगड़े कि पूरा इलाका तनाव और गुस्से की चपेट में आ गया। शनिवार 21 मार्च 2026 की सुबह कोसीकलां इलाके के पास हुए हादसे में 57 वर्षीय चंद्रशेखर दास की जान चली गई और कुछ ही घंटों में दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे आक्रोश का मैदान बन गया। समर्थकों की भारी भीड़ सड़क पर उतर आई, नारेबाजी हुई, जाम लगा और फिर देखते ही देखते मामला हिंसा तक पहुंच गया। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की चिंता इसलिए भी बढ़ा दी, क्योंकि उसी दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मथुरा जिले के गोवर्धन क्षेत्र के दौरे पर थीं, जिससे सुरक्षा और संवेदनशीलता दोनों कई गुना बढ़ गई थीं।
हाईवे जाम, पथराव और पुलिस पर हमला
पुलिस के मुताबिक, चंद्रशेखर दास की मौत की खबर फैलते ही हजारों समर्थक हाईवे पर जमा हो गए और सड़क जाम कर दी। कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। जब पुलिस ने रास्ता खाली कराने की कोशिश की, तो भीड़ उग्र हो गई और पथराव शुरू हो गया। इस हिंसा में 23 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि पुलिस चौकी और कई सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि मामला सिर्फ विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती में बदल गया। पुलिस ने इस मामले में 22 नामजद और करीब 250 से 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। ताज़ा रिपोर्टों में 19 से 20 लोगों के गिरफ्तार होकर जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
दक्ष चौधरी समेत कई पर केस, बरामदगी भी हुई
कोसीकलां थाने में दर्ज केस में दक्ष चौधरी और उसके साथियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि दक्ष चौधरी पर पहले भी कई आपराधिक आरोप रहे हैं और उसके पुराने रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इस मामले में आरोपियों के पास से डंडे, ईंट-पत्थर और खोखा कारतूस जैसी चीजें बरामद होने की बात भी कही गई है। आरोपियों पर फायरिंग, हमला, सरकारी काम में बाधा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। साथ ही आईटी एक्ट के तहत भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है, क्योंकि अफवाह और उकसावे की भूमिका को भी खंगाला जा रहा है।
हादसा या साजिश, जांच के बीच प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला
पुलिस ने उस ट्रक चालक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है, जिसकी गाड़ी से टक्कर लगने पर चंद्रशेखर दास की मौत हुई। अधिकारियों का कहना है कि कम दृश्यता और घने कोहरे के बीच यह एक हादसा था, लेकिन समर्थक इसे मानने को तैयार नहीं हैं और इसे पशु तस्करों की साजिश बता रहे हैं। प्रशासन ने समर्थकों की मांग पर बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार कराए जाने की बात कही है। वहीं जिला प्रशासन ने आजनौंख गांव की गौशाला में चंद्रशेखर दास की याद में स्मारक बनाने, वहां पुलिस चौकी स्थापित करने और करीब 400 गायों की देखभाल फिलहाल प्रशासन की निगरानी में कराने का फैसला लिया है। फिलहाल मथुरा में शांति बहाल करने की कोशिश जारी है, लेकिन यह साफ है कि ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत अब सिर्फ एक हादसे की कहानी नहीं, बल्कि बड़ा कानून-व्यवस्था और राजनीतिक संवेदनशीलता वाला मामला बन चुकी है।