कफसाड़ कांड रोजाना नए नए खुलासे और अपडेट सामने आ रहे हैं। देर रात पुलिस के कड़े पहरे के बीच अपहरण पीड़िता को पुलिस मेरठ के आस्था ज्योति केंद्र से उसके घर कफसाड़ गांव लेकर पहुंची और परिवार सौंप दिया।

Meerut: मेरठ के कफसाड़ कांड रोजाना नए नए खुलासे और अपडेट सामने आ रहे हैं। देर रात पुलिस के कड़े पहरे के बीच अपहरण पीड़िता को पुलिस मेरठ के आस्था ज्योति केंद्र से उसके घर कफसाड़ गांव लेकर पहुंची और परिवार सौंप दिया।
कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद पुलिस रूबी को आशा ज्योति केंद्र लाई थी। सीओ सरधना आशुतोष कुमार स्वयं रूबी के पिता सतेंद्र, भाई नरसी व शिवम और तहेरी बहन सर्वेश को उससे मिलाने लेकर पहुंचे थे।
कल रात परिवार को देखते ही रूबी खुद को संभाल नहीं पाई। पिता से लिपटकर देर तक रोती रही। रूबी ने पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार बताया। वह अपनी दो सहेलियों के साथ गन्ना छीलने पिता के पास जा रही थी। मां सुनीता पीछे-पीछे आ रही थीं। तभी रजवाहे के पास गन्ने के खेत से पारस अचानक निकल आया। उसके हाथ में फरसा था, सहेलियां डरकर भाग गईं पारस ने रूबी का हाथ पकड़ लिया और जबरन खींचने लगा। मां सुनीता ने विरोध किया तो पारस ने गुस्से में फरसे से वार कर दिया, रूबी हाथ जोड़कर उसे रोकती रही, गिड़गिड़ाती रही, लेकिन वह नहीं रुका। मां जमीन पर गिर पड़ीं। इसके बाद पारस रूबी को घसीटते हुए गन्ने के खेत में ले गया।
रूबी किसी तरह छूटकर रजवाहे में गिरी, लेकिन पारस भी कूद पड़ा। उसने तमंचा दिखाकर धमकी दी जैसे तेरी मां को मारा है, वैसे ही तेरे पिता और भाई को भी मार दूंगा। डर के मारे रूबी की आवाज गले में ही अटक गई। करीब डेढ़ घंटे तक वह उसे ठेके के पीछे गन्ने के खेत में बैठाकर रखे रहा। डर और सदमे की हालत में रूबी उसके साथ गंगनहर पटरी तक चली गई। वहां तमंचा दिखाकर पारस ने एक ट्रक रुकवाया। पहले खतौली, फिर दिल्ली ले गया। वह चादर में तमंचा छिपाकर बार-बार दिखाता रहा, इसी वजह से रूबी ने ट्रेन या रास्ते में शोर नहीं मचाया।
पूरे गांव से पसरा सन्नाटा और पुलिस का कड़ा पहरा ताजा हालात की कहानी को खुद ही बयां कर रहा हैं।
Meerut: मेरठ के कफसाड़ कांड रोजाना नए नए खुलासे और अपडेट सामने आ रहे हैं। देर रात पुलिस के कड़े पहरे के बीच अपहरण पीड़िता को पुलिस मेरठ के आस्था ज्योति केंद्र से उसके घर कफसाड़ गांव लेकर पहुंची और परिवार सौंप दिया।
कोर्ट में बयान दर्ज कराने के बाद पुलिस रूबी को आशा ज्योति केंद्र लाई थी। सीओ सरधना आशुतोष कुमार स्वयं रूबी के पिता सतेंद्र, भाई नरसी व शिवम और तहेरी बहन सर्वेश को उससे मिलाने लेकर पहुंचे थे।
कल रात परिवार को देखते ही रूबी खुद को संभाल नहीं पाई। पिता से लिपटकर देर तक रोती रही। रूबी ने पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार बताया। वह अपनी दो सहेलियों के साथ गन्ना छीलने पिता के पास जा रही थी। मां सुनीता पीछे-पीछे आ रही थीं। तभी रजवाहे के पास गन्ने के खेत से पारस अचानक निकल आया। उसके हाथ में फरसा था, सहेलियां डरकर भाग गईं पारस ने रूबी का हाथ पकड़ लिया और जबरन खींचने लगा। मां सुनीता ने विरोध किया तो पारस ने गुस्से में फरसे से वार कर दिया, रूबी हाथ जोड़कर उसे रोकती रही, गिड़गिड़ाती रही, लेकिन वह नहीं रुका। मां जमीन पर गिर पड़ीं। इसके बाद पारस रूबी को घसीटते हुए गन्ने के खेत में ले गया।
रूबी किसी तरह छूटकर रजवाहे में गिरी, लेकिन पारस भी कूद पड़ा। उसने तमंचा दिखाकर धमकी दी जैसे तेरी मां को मारा है, वैसे ही तेरे पिता और भाई को भी मार दूंगा। डर के मारे रूबी की आवाज गले में ही अटक गई। करीब डेढ़ घंटे तक वह उसे ठेके के पीछे गन्ने के खेत में बैठाकर रखे रहा। डर और सदमे की हालत में रूबी उसके साथ गंगनहर पटरी तक चली गई। वहां तमंचा दिखाकर पारस ने एक ट्रक रुकवाया। पहले खतौली, फिर दिल्ली ले गया। वह चादर में तमंचा छिपाकर बार-बार दिखाता रहा, इसी वजह से रूबी ने ट्रेन या रास्ते में शोर नहीं मचाया।
पूरे गांव से पसरा सन्नाटा और पुलिस का कड़ा पहरा ताजा हालात की कहानी को खुद ही बयां कर रहा हैं।