
झांसी के समथर में सजा बुंदेली लोककला का मंच (Img: Dynamite News)
Jhansi: कहीं भक्ति के सुर गूंजे तो कहीं बुंदेली लोकगीतों की जवाबी तान ने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट और कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों के बीच समथर नगर की रामलीला मंच पर सजी भजन संध्या यादगार बन गई। यह आयोजन स्वर्गीय रमेश दादू की पुण्य स्मृति में किया गया, जिसमें बुंदेली संस्कृति, लोककला और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में पूर्व सपा गरौठा विधायक दीपनारायण सिंह यादव मुख्य अतिथि और उनके सुपुत्र दीपांकर यादव उर्फ मून भैया विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान आयोजक इंद्रजीत ने मून भैया को चांदी का मुकुट पहनाकर उनका स्वागत किया।
समथर की रामलीला मंच पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बुंदेलखंड की पारंपरिक जवाबी भजन और लोकगीत प्रतियोगिता रही। मंच पर मशहूर कलाकार जयसिंह राजा, सुशीला कुशवाह और रोशनी राजपूत ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। एक ओर भजनों की भक्तिमय तान सुनाई दी, तो दूसरी ओर लोकगीतों की जवाबी प्रस्तुति ने महफिल में नया रंग भर दिया।
पूर्व विधायक दीपनारायण सिंह यादव और मून भैया रहे मुख्य अतिथि (Img: Dynamite News)
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कलाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान श्रोता देर तक झूमते नजर आए। पूरे आयोजन में बुंदेली लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिली। भक्ति और मनोरंजन से सजी इस शाम ने स्थानीय कला परंपरा को मंच देने के साथ लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी दिया।
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इस आयोजन के पीछे एक भावुक कहानी भी जुड़ी है। स्वर्गीय रमेश दादू पुलिस विभाग में तैनात थे, लेकिन नौकरी के साथ-साथ उन्हें संगीत, साहित्य और कला मंचों से गहरा लगाव था। उनके इसी शौक और यादों को जीवंत रखने के लिए उनके बेटे इंद्रजीत पिछले आठ वर्षों से लगातार भजन संध्या और लोकगीत कार्यक्रम का आयोजन कर रहे हैं।
इंद्रजीत के लिए यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपने पिता की स्मृतियों को सहेजने और उनके व्यक्तित्व को लोगों के बीच जीवित रखने का माध्यम है। कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ और कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच पिता के प्रति सम्मान और भावनाओं की झलक भी देखने को मिली।
कार्यक्रम के दौरान आयोजक इंद्रजीत भावुक हो गए। उन्होंने नगरवासियों से कहा कि जिस तरह लोगों ने उनके पिता रमेश दादू को सम्मान और प्यार दिया, वैसा ही स्नेह आज उन्हें भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वह भी अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए लोगों के बीच रहकर सेवा करना चाहते हैं।
मून भैया को चांदी का मुकुट पहनाकर किया गया स्वागत (Img: Dynamite News)
इंद्रजीत ने नगरवासियों से अपील की कि वे उन्हें अपना बेटा समझकर आशीर्वाद दें। उन्होंने कहा कि यदि उनसे कोई गलती हो, तो उन्हें डांटकर सही रास्ता दिखाएं। उनकी इस भावुक अपील ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक आयोजन के साथ-साथ पारिवारिक और सामाजिक जुड़ाव का रूप भी दिया।
स्वर्गीय रमेश दादू की पुण्य स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम में भक्ति, लोकगीत और बुंदेली कला की रंगत देर तक छाई रही। जयसिंह राजा, सुशीला कुशवाह और रोशनी राजपूत की प्रस्तुतियों ने लोगों का मनोरंजन किया, वहीं इंद्रजीत की भावुक अपील ने आयोजन को खास बना दिया। समथर की यह शाम इस बात की याद दिला गई कि किसी इंसान के जाने के बाद भी उसका व्यवहार, उसकी कला के प्रति लगाव और लोगों के दिलों में बनाई गई जगह लंबे समय तक जिंदा रहती है।
Location : Jhansi
Published : 28 October 2026, 4:34 PM IST