
पूर्वी यूपी में मेघों का तांडव (Img- Envato)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में मानसून की चाल एक बार फिर बदल गई है। बंगाल की खाड़ी में बने नए कम दबाव के क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) के कारण प्रदेश दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है।
एक तरफ जहां पूर्वी उत्तर प्रदेश और तराई इलाकों में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी यूपी के जिलों में कड़ाके की धूप और चिपचिपी उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
मौसम विभाग ने 30 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और लखनऊ समेत आसपास के जिलों में हल्की से तेज बारिश का पूर्वानुमान जताया है। बनारस में भादो महीने की शुरुआत ही गरज-चमक और झमाझम बारिश के साथ हुई है।
प्रयागराज में बीते 24 घंटों के भीतर 66.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 31 अगस्त और 1 सितंबर को पूर्वी इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। यह बारिश खरीफ की फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है।
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इंडस्ट्रियल सिटी कानपुर में इस बार मानसून बेहद मेहरबान रहा है। शहर में अगस्त महीने के दौरान सामान्य से 39 प्रतिशत ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। बीते शनिवार की शाम अचानक छाए काले बादलों के कारण दिन में ही अंधेरा छा गया और वाहनों की लाइटें जलानी पड़ीं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर की शुरुआत भी बारिश के साथ होगी और फिलहाल राहत मिलने के आसार नहीं हैं।
पूर्वी यूपी के विपरीत, ताजनगरी आगरा और मेरठ समेत पश्चिमी यूपी में बारिश का सिलसिला थम गया है। आगरा में 2 सितंबर तक आसमान साफ रहेगा, जिससे अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने और 89% आर्द्रता के कारण उमस बढ़ने की संभावना है।
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मेरठ में इस बार अगस्त की बारिश ने 75 सालों में दिन के रिकॉर्ड तापमान को रोक दिया, हालांकि अगले दो-तीन दिन यहां मौसम शुष्क ही बना रहेगा। पश्चिमी यूपी में 3 सितंबर के बाद ही बादलों की वापसी हो सकती है।
Location : Lucknow
Published : 30 August 2026, 8:15 AM IST