
अब चालान खत्म होने का रास्ता बंद (Source: Pinterest )
Lucknow: उत्तर प्रदेश में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के लिए अब राहत की गुंजाइश कम होने वाली है। मंगलवार को उत्तर प्रदेश दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) विधेयक-2026 को सदन से पारित कर दिया गया। नए प्रावधानों के बाद मोटर वाहन अधिनियम के तहत नियम तोड़ने वालों को जुर्माना भरने के साथ-साथ सजा वाले अपराधों में सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।
पहले राज्य में ऐसी व्यवस्था थी कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान होने और जुर्माना लगाए जाने के बाद निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर एक अवधि के बाद मामला स्वत: समाप्त हो जाता था। नए विधेयक के पारित होने के बाद इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई लंबित रहने की स्थिति में केवल समय बीतने से मामला समाप्त नहीं होगा।
इस बदलाव के पीछे सुप्रीम कोर्ट का रुख भी अहम माना जा रहा है। पिछले वर्ष 20 नवंबर को एक याचिका की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत नियमों के उल्लंघन पर निर्धारित दंड को समाप्त नहीं किया जा सकता।
सरकार ने वर्ष 2023 में वर्ष 2017 से 2021 के बीच यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े करीब 11 लाख मुकदमों और चालानों को समाप्त करने का निर्णय लिया था। बाद में इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। इसके बाद सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े दंडात्मक प्रावधानों को प्रभावी बनाए रखने के लिए सदन में संशोधन विधेयक पेश किया।
विधेयक पारित होने के बाद मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन करने वालों को निर्धारित जुर्माना भरना होगा। वहीं, जिन अपराधों में सजा का प्रावधान है, उनमें संबंधित वाहन चालक को कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा भी भुगतनी पड़ सकती है। यानी केवल चालान की रकम जमा नहीं करने या मामला लंबित रहने से कार्रवाई खत्म नहीं होगी।
इस विधेयक से संबंधित प्रस्ताव को सरकार की कैबिनेट बैठक में पहले ही मंजूरी दी जा चुकी थी। इसके बाद इसे विधानसभा में पेश किया गया और मंगलवार को सदन से पारित कर दिया गया। नए प्रावधान लागू होने के बाद यातायात नियमों के पालन को लेकर वाहन चालकों पर कार्रवाई और सख्त होने की उम्मीद है।
Location : Lucknow
Published : 5 August 2026, 12:35 PM IST