
प्रतीकात्मकत छवि (सोर्स-AI Generated )
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक दौर ऐसा था जब विधान परिषद में शिक्षक संघों का दबदबा हुआ करता था। विधान परिषद की सभी शिक्षक सीटों पर लंबे समय तक इन्हीं संगठनों का एकछत्र राज रहता था। लेकिन समय के साथ बदलते राजनीतिक समीकरणों और आपसी गुटबाजी के चलते शिक्षक राजनीति का दायरा लगातार सिमटता चला गया। आज आलम यह है कि विधान परिषद में केवल कानपुर से राज बहादुर सिंह चंदेल के रूप में इकलौते शिक्षक एमएलसी बचे हैं, जबकि इस बार के चुनाव में शिक्षक संघों के लगभग सभी प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई है।
सत्तर के दशक यानी 1972 में माध्यमिक शिक्षक संघ के बंटवारे के बाद शर्मा गुट और पांडेय गुट अस्तित्व में आए। उस दौरान उत्तर प्रदेश में कुल 9 शिक्षक सीटें हुआ करती थीं, जिन पर ज्यादातर माध्यमिक शिक्षक संघ का ही कब्जा रहता था। एक वक्त ऐसा भी आया जब ओम प्रकाश शर्मा के नेतृत्व वाला शर्मा गुट इतना प्रभावशाली हो गया कि उसने लगातार लंबे समय तक सभी शिक्षक सीटों पर कब्जा बनाए रखा।
वर्ष 2000 में उत्तराखंड के गठन के बाद यूपी में 8 शिक्षक और 8 स्नातक सीटें रह गईं, लेकिन इसके बावजूद शर्मा गुट का दबदबा कायम रहा। राजनीतिक रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस दौर में शर्मा गुट के अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा कभी विधान परिषद के सभापति तो कभी नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में रहे।
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शिक्षक संघों के कमजोर होने की शुरुआत भीतरघात और आपसी फूट से हुई। मजबूत स्तंभ माने जाने वाले पंचानन राय के निधन के बाद 2008 में चेतनारायण सिंह शर्मा गुट से बगावत कर अलग हो गए और अपना नया संगठन बना लिया। इसके बाद 2010 में राज बहादुर सिंह चंदेल भी अलग हो गए, जिससे शर्मा गुट की नींव हिल गई।
दूसरी तरफ, मुख्यधारा के राजनीतिक दलों ने शिक्षक सीटों पर सीधी दखलंदाजी शुरू कर दी। वर्ष 2014 में निजी स्कूलों के शिक्षकों को मतदाता का दर्जा मिलने से राजनीतिक दलों को इन चुनावों में अपनी पकड़ मजबूत करने का बड़ा अवसर मिल गया।
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हालिया चुनाव परिणामों ने शिक्षक संघों की बची-खुची ताकत को भी झकझोर कर रख दिया है। वाराणसी सीट से चंदेल गुट के चेतनारायण सिंह को छोड़कर अन्य सभी शिक्षक संगठनों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई है। शर्मा गुट, पांडेय गुट और ठकुराई गुट के अधिकांश उम्मीदवार न्यूनतम वोटों के फेर में उलझकर रह गए।
इस चुनाव के बाद विधान परिषद के आंकड़ों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां एक ओर भाजपा और समाजवादी पार्टी ने अपनी स्थिति मजबूत की है, वहीं गैर-राजनीतिक शिक्षक समूह पूरी तरह शून्य हो गया है। कभी विधान परिषद की धुरी रहने वाले शिक्षक संघ आज अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने को मजबूर हैं।
Location : Lucknow
Published : 30 October 2026, 8:50 AM IST
Topics : BJP vs Teacher Unions Sharma Group MLC Teacher MLC Elections UP Legislative Council UP Politics News