UP SI परीक्षा का सवाल बना सियासी मुद्दा, सपा ने उठाए ये सवाल

यूपी एसआई भर्ती परीक्षा में प्रश्नपत्र के एक सवाल में ‘पंडित’ शब्द विकल्प के रूप में आने पर विवाद खड़ा हो गया है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने नाराजगी जताई है, वहीं सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 15 March 2026, 10:43 AM IST

Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश में आयोजित यूपी सब इंस्पेक्टर परीक्षा (UP Sub Inspector Exam) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। परीक्षा की पहली पाली के दौरान प्रश्नपत्र में पूछे गए एक सवाल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि प्रश्नपत्र में “अवसर के अनुसार बदल जाने वाले व्यक्ति” से जुड़े सवाल के विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द भी शामिल किया गया था। जैसे ही यह प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से सामने आया, इस पर विवाद खड़ा हो गया।

डिप्टी सीएम ने जताई नाराजगी

इस मामले पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री बृजेश पाठक (Brijesh Pathak)ने भी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए मामले की गंभीरता पर ध्यान दिलाया। डिप्टी सीएम की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा और भी चर्चा में आ गया है और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

वहीं इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र मलिक (Harendra Malik )ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने प्रश्नपत्र में ‘पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में शामिल किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। हरेंद्र मलिक ने कहा कि किसी भी जाति या समुदाय को अपमानित करना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मानसिकता अक्सर धर्म और जाति के नाम पर समाज को बांटने वाली रही है।

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अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

सपा सांसद ने कहा कि संविधान के अनुसार देश में सभी नागरिक समान हैं और किसी भी समुदाय का अपमान करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि “पंडित” शब्द को अवसरवादी की श्रेणी में रखना सनातन धर्म मानने वालों और शिक्षित समाज के लोगों का अपमान है।

उनका कहना था कि पंडित शब्द का अर्थ विद्वान या ज्ञानी व्यक्ति से भी जुड़ा होता है और समाज में इसका सम्मानजनक स्थान है। हरेंद्र मलिक ने सरकार से मांग की कि इस प्रश्न को तैयार करने वाले अधिकारियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

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जांच और कार्रवाई की मांग

इस पूरे मामले को लेकर अब राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कई लोग इसे परीक्षा प्रणाली में लापरवाही बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे गंभीर सामाजिक मुद्दे के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल यह देखना बाकी है कि सरकार या परीक्षा से जुड़े अधिकारी इस विवाद पर क्या कदम उठाते हैं और क्या इस मामले में किसी प्रकार की जांच या कार्रवाई की जाती है।

Location : 
  • Muzaffarnagar

Published : 
  • 15 March 2026, 10:43 AM IST