
सपा प्रमुख अखिलेश यादव (सोर्स- Pinterest)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 खाली सीटों पर चुनाव का बिगुल फूंक दिया गया है। हर एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों का समर्थन चाहिए। असेंबली के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो समाजवादी पार्टी दो सीट निकालने की पोजीशन में है, जबकि भाजपा के पाले में 8 सीटें जाती दिख रही हैं। हालांकि, चर्चा ये भी है कि अखिलेश यादव एक और सीट जीतने का जोखिम उठा सकते हैं। आइए समझते हैं पूरा गणित।
रिटायरमेंट से खाली हो रही 10 सीटों में से 8 अभी भाजपा के पास, और 1-1 सीट सपा-बसपा के पास थी (बसपा का खाता विधानसभा में शून्य है)।
सपा के पास कागजों पर 97 विधायक हैं, लेकिन पार्टी अंदरखाने 95 ही मान रही है।
पार्टी से बाहर हुईं पूजा पाल और जेल में बंद पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की पत्नी विधायक महाराजी देवी का साथ पिछले चुनाव में नहीं मिला था, इस बार भी उम्मीद जीरो है।
विश्लेषकों का मानना है कि दो सीटें जीतने के बाद सपा के पास 21 विधायक बचेंगे, पर तीसरी सीट के लिए 16 वोट और चाहिए। खुद सपा रणनीतिक इतने वोट जुगाड़ना नामुमकिन मान रहे हैं।
सत्ताधारी भाजपा के पास अपने 256 विधायक हैं। सहयोगी दलों का साथ जोड़ें तो स्थिति ऐसी बनती है-
अपना दल (एस): 13 विधायक
रालोद: 9 विधायक
निषाद पार्टी: 5 विधायक
सुभासपा: 6 विधायक
असंबद्ध (मनोज पांडेय, राकेश सिंह, अभय सिंह): 3 विधायक
जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक): 2 विधायक
इन सबको मिला लें तो भाजपा-एनडीए का कुल योग 294 पहुंचता है। आठ सीटें जीतने के लिए 296 वोटों की जरूरत है यानी सिर्फ 2 वोट कम, जो आसानी से मिल जाएंगे। 2024 के चुनाव में सपा के 7 विधायकों (मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, विनोद चतुर्वेदी, राकेश पांडेय, पूजा पाल, आशुतोष मौर्य) ने क्रॉस वोटिंग की थी और महाराजी देवी अनुपस्थित थीं, जिससे सपा फूंक-फूंककर कदम रख रही है।
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन (जो 2024 में हार गए थे) और सिटिंग सांसद प्रो. रामगोपाल यादव (25 नवंबर को कार्यकाल खत्म हो रहा) का नाम लगभग तय है। इसके अलावा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को साधने के लिए तीसरा प्रत्याशी भी उतारा जा सकता है।
अखिलेश यादव यदि तीसरी सीट पर बाजी पलटना चाहते हैं, तो उन्हें चमत्कारिक जोड़-तोड़ पर उतरना होगा। 37 के जादुई आंकड़े में से 16 कम पड़ रहे वोटों के फासले को पाटने के लिए विपक्ष को सत्ता पक्ष या असंबद्ध पाले में बड़ी सेंध लगानी होगी। कागजों पर यह असंभव दिखता है, लेकिन राजनीति में सीक्रेट रणनीति और आखिरी वक्त के खेल से ही अतिरिक्त सीट का समीकरण बन सकता है वरना नतीजा 8-2 पर लॉक है।
Location : Lucknow
Published : 23 September 2026, 9:49 AM IST
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