
प्रतीकात्मक छवि
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उच्चीकृत अस्पतालों के लिए प्रस्तावित करीब 82 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरणों की खरीद प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। खरीद से पहले पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को इस मामले की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उच्चीकृत अस्पतालों में उपकरण खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए चिकित्सा महानिदेशालय की ओर से 20 अगस्त 2026 को शासन को प्रस्ताव भेजा गया था।
इस प्रस्ताव पर राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी ने आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उपकरण खरीद प्रक्रिया में महानिदेशालय और आपूर्तिकर्ताओं के बीच संभावित सांठगांठ की जांच की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने अब इस मामले में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष को जांच कराने और रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
राज्यसभा सांसद ने करीब 82 करोड़ रुपये के उपकरण खरीद प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने पूरे मामले की जांच के लिए चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित करने का सुझाव दिया है।
सांसद ने महानिदेशालय स्तर पर गठित खरीद समिति में शामिल अधिकारियों के नाम, पद और उनकी शैक्षिक व तकनीकी योग्यता की भी जांच कराने की मांग की है।
पत्र में महानिदेशालय में तैनात एक लिपिक को हटाए जाने के मामले की जांच की भी मांग की गई है। आरोप लगाया गया है कि उपकरण खरीद से जुड़े मामलों में संबंधित लिपिक की विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच करोड़ों रुपये के प्रस्तावों और खरीद सौदों में भूमिका की शिकायतें सामने आती रही हैं।
अब जांच में यह भी देखा जाएगा कि लिपिक को किन परिस्थितियों में हटाया गया और क्या खरीद प्रक्रिया से जुड़े किसी अनियमितता का संबंध इससे है।
राज्यसभा सांसद ने पहले खरीदे गए चिकित्सा उपकरणों की स्थिति की भी जांच कराने की मांग की है। इसमें यह पता लगाने को कहा गया है कि पुराने उपकरण अभी उपयोग में हैं या नहीं।
यदि कोई उपकरण खराब या निष्प्रयोज्य घोषित किया गया है तो यह भी जांच का विषय होगा कि उसे किस अधिकारी ने अनुपयोगी घोषित किया, उसकी नीलामी कब हुई और उससे प्राप्त धनराशि सरकारी खजाने में जमा हुई या नहीं।
82 करोड़ रुपये के उपकरण खरीद प्रस्ताव की जांच के आदेश के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की खरीद प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
Location : Lucknow
Published : 12 September 2026, 1:34 PM IST
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