UP Elections: INDIA गठबंधन का सीट फॉर्मूला क्या होगा? कांग्रेस की A, B, C, D कैटेगरी से बढ़ी चर्चा

कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के सामने 172 विधानसभा सीटों की सूची रखी है। A, B, C और D श्रेणियों में बंटी सीटों पर दावेदारी के बीच सवाल है कि अखिलेश यादव और कांग्रेस नेतृत्व के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला क्या होगा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 23 October 2026, 2:37 PM IST

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने सपा के सामने अपनी पसंद की 172 विधानसभा सीटों की सूची रखी है। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी ने इन सीटों को A, B, C और D श्रेणियों में बांटा है। कांग्रेस A कैटेगरी की सीटों पर अपनी दावेदारी को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है, जबकि दूसरी श्रेणियों की सीटों पर बातचीत और समझौते की गुंजाइश बताई जा रही है। ऐसे में सवाल है कि गठबंधन को आगे बढ़ाने के लिए अखिलेश यादव और सपा नेतृत्व किस फॉर्मूले पर सहमत होंगे।

प्रियंका गांधी की बैठकों के बाद तैयार हुई सूची

मीडिया रिपोर्टों और पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश के नेताओं के साथ हुई बैठकों में सीटों को लेकर चर्चा की गई। इस कवायद में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी हिस्सा लिया। पार्टी ने अपने संगठन की स्थिति, पिछले चुनावों के प्रदर्शन और संभावित जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सीटों की प्राथमिकता तय की है।

कांग्रेस का कहना है कि गठबंधन में केवल सीटों की संख्या ही नहीं, बल्कि उन सीटों का महत्व भी मायने रखता है जहां पार्टी का संगठन मजबूत है और उसके उम्मीदवार जीत की स्थिति में हो सकते हैं। इसी आधार पर 172 सीटों की सूची सपा के सामने रखे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, दोनों दलों के बीच अंतिम सीट बंटवारे पर अभी सहमति नहीं बनी है।

A, B, C और D कैटेगरी का क्या है मतलब?

कांग्रेस ने अपनी रणनीति के तहत विधानसभा सीटों को चार श्रेणियों में बांटा है। रिपोर्टों के अनुसार, A कैटेगरी में उन सीटों को रखा गया है, जहां कांग्रेस अपनी मजबूत दावेदारी मानती है और समझौते की गुंजाइश कम रखना चाहती है।

B कैटेगरी की सीटों पर पार्टी कुछ बदलावों के लिए तैयार हो सकती है। वहीं, C और D श्रेणी की सीटों पर सपा के साथ बातचीत करके समझौते का रास्ता निकाला जा सकता है। इस वर्गीकरण का उद्देश्य सीट बंटवारे के दौरान पार्टी की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रखना है।

कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी मजबूत सीटों पर दावेदारी बनाए रखते हुए सपा के साथ गठबंधन को भी आगे बढ़ाए। दूसरी तरफ, सपा को अपने संगठन, मौजूदा विधायकों और स्थानीय नेताओं की दावेदारी को ध्यान में रखकर फैसला करना होगा।

कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है कांग्रेस?

कांग्रेस की ओर से 172 सीटों की सूची दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि पार्टी अंतिम रूप से इतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ेगी। रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस फिलहाल सीटों की किसी एक निश्चित संख्या पर अड़े रहने के बजाय गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है।

इससे पहले भी कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश में अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा सामने आती रही है। पार्टी का जोर इस बात पर है कि सीटों का बंटवारा संगठन की मजबूती और चुनावी संभावनाओं के आधार पर हो। अंतिम संख्या दोनों दलों के बीच होने वाली बातचीत के बाद ही तय होगी।

अखिलेश यादव के सामने क्या है चुनौती?

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने गठबंधन के सहयोगी दल को संतुष्ट करने और अपनी पार्टी के संगठनात्मक हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। ऐसे में सीट बंटवारे के दौरान दोनों दलों के नेताओं को अपने उम्मीदवारों, स्थानीय समीकरणों और जीत की संभावनाओं पर विचार करना होगा।

रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि दोनों दल सीट बंटवारे के लिए संयुक्त समिति बनाने पर विचार कर सकते हैं। ऐसी समिति बनने पर संबंधित सीटों को लेकर दोनों पक्षों के दावों पर चर्चा की जा सकती है। हालांकि, समिति के गठन और उसके अधिकारों को लेकर किसी अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं हुई है।

2024 के लोकसभा चुनाव का फॉर्मूला दोहराने की कोशिश

कांग्रेस और सपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में सपा ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीती थीं। दोनों दलों की संयुक्त संख्या 43 रही थी। इस प्रदर्शन के बाद गठबंधन को आगामी विधानसभा चुनाव में भी जारी रखने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।

हालांकि, लोकसभा और विधानसभा चुनावों के समीकरण अलग होते हैं। विधानसभा चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार, क्षेत्रीय संगठन और विधानसभा क्षेत्र के जातीय-सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए 2024 के गठबंधन की सफलता के बावजूद 2027 के लिए सीट बंटवारे पर सहमति बनाना दोनों दलों के लिए अहम होगा।

कब होगा सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला?

फिलहाल कांग्रेस और सपा के बीच सीटों को लेकर बातचीत जारी रहने की संभावना है। दोनों पक्षों के नेताओं को अपनी-अपनी प्राथमिकताओं और दावों पर विचार करना होगा। कांग्रेस जहां मजबूत मानी जाने वाली सीटों पर अपनी दावेदारी सुरक्षित रखना चाहती है, वहीं सपा के लिए भी अपने संगठन और स्थानीय नेतृत्व के हितों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि बातचीत के दौरान A कैटेगरी की सीटों को लेकर कांग्रेस का रुख कितना कायम रहता है और सपा कितनी सीटों पर समझौते के लिए तैयार होती है। अंतिम समझौते की घोषणा होने तक 172 सीटों की सूची को कांग्रेस की ओर से रखी गई दावेदारी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

Location :  Lucknow

Published :  23 October 2026, 2:37 PM IST