
दीपोत्सव को तैयार (img: Dynamite news)
Sultanpur: अयोध्या में भगवान श्रीराम की नगरी दीपों से जगमगाने को तैयार है तो सुलतानपुर का दियरा घाट भी दीपोत्सव की आभा बिखेरने की तैयारी में है। मान्यता है कि लंका विजय के बाद अयोध्या लौटते समय प्रभु श्रीराम ने धोपाप में गोमती नदी में स्नान किया और इसके बाद करीब पांच किलोमीटर उत्तर दियरा घाट पर पहुंचकर पहला दीप जलाया था। इसी धार्मिक मान्यता के चलते दियरा को दीपावली की परंपरा से जुड़ा विशिष्ट स्थल माना जाता है। एक ओर अयोध्या में भव्य दीप महोत्सव की गूंज है तो दूसरी ओर गोमती तट का यह ऐतिहासिक और आस्थापूर्ण स्थल अपनी गौरवशाली स्मृतियों के साथ दीपोत्सव के लिए तैयार हो रहा है।
मोतिगरपुर क्षेत्र स्थित दियरा गांव की पहचान केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि रामायणकालीन लोकमान्यताओं और ऐतिहासिक विरासत के रूप में भी है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय के बाद प्रभु श्रीराम अयोध्या लौटते समय धोपाप घाट पर स्नान करने के बाद दियरा पहुंचे थे। यहां रात्रि विश्राम और दीप प्रज्ज्वलन का प्रसंग स्थानीय जनश्रुतियों में पीढ़ियों से प्रचलित है। कहा जाता है कि प्रभु के आगमन की खुशी में ग्रामीणों ने अपने घरों को दीपों से रोशन किया था।
ये भी पढ़े: सुलतानपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 24 घंटे में सुलझा चांदी लूट का सनसनीखेज मामला, चार किलो से अधिक माल बरामद
दियरा घाट पर गोमती नदी के किनारे स्थित सैकड़ों वर्ष पुराना श्रीराम-जानकी मंदिर इस धार्मिक विरासत का प्रमुख प्रतीक है। बताया जाता है कि दियरा रियासत के राजा ने मंदिर का निर्माण कराया था। इसकी प्राचीन कलाकृतियां और स्थापत्य शैली आज भी अतीत की स्मृतियों को संजोए हुए हैं। दियरा से करीब दो किलोमीटर दूर हरिशयनी (नागापुर) गांव का भी प्रभु श्रीराम के आगमन और स्वागत से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं में उल्लेख मिलता है।
अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन के अवसर पर तत्कालीन सदर विधायक सीताराम वर्मा ने बड़ी संख्या में लोगों के साथ दियरा घाट पर दीप प्रज्ज्वलित किया था। दीपावली पर भी यहां दीप जलाने की परंपरा निभाई जाती है।
राम मंदिर के भूमि पूजन पर भी जगमगाया था दियरा घाट (img: Dynamite news)
ये भी पढ़े: सुलतानपुर में खाकी भी खा गई धोखा, साइबर ठगों ने APK लिंक के जरिए दरोगा के खाते से उड़ाए 1.69 लाख
रामायणकालीन मान्यताओं और प्राचीन मंदिर की विरासत के बावजूद दियरा घाट आज भी अपेक्षित विकास की बाट जोह रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दीपावली पर दीप जलाने और आयोजन तक ही जनप्रतिनिधियों की सक्रियता सीमित रह जाती है। मंदिर के संरक्षण, घाट के सुंदरीकरण, प्रकाश व्यवस्था और धार्मिक पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने की दिशा में ठोस पहल की जरूरत है।
अयोध्या का दीप महोत्सव जहां भगवान श्रीराम की वापसी की स्मृति को भव्य स्वरूप दे रहा है, वहीं सुलतानपुर का दियरा घाट उसी आस्था की स्थानीय लोकपरंपरा को जीवंत रखे हुए है। जरूरत है कि इस स्थल को भी उसकी धार्मिक मान्यता और ऐतिहासिक विरासत के अनुरूप पहचान मिले, ताकि गोमती तट का यह दीपस्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।
Location : Sultanpur
Published : 7 November 2026, 3:32 PM IST