ओबरा स्थित बिजली विभाग से जुड़े सफाई कर्मियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। नई टेंडर प्रक्रिया के नाम पर काम से रोके जाने और पिछले तीन महीनों से वेतन न मिलने के विरोध में कर्मियों ने ओबरा सी परियोजना गेट पर गांधीवादी सत्याग्रह शुरू कर दिया है।

सफाई कर्मियों का सत्याग्रह
Sonbhadra: सोनभद्र के ओबरा स्थित बिजली विभाग से जुड़े सफाई कर्मियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। नई टेंडर प्रक्रिया के नाम पर काम से रोके जाने और पिछले तीन महीनों से वेतन न मिलने के विरोध में कर्मियों ने ओबरा सी परियोजना गेट पर गांधीवादी सत्याग्रह शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ के बैनर तले चल रहे इस धरने में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हैं।
प्रदर्शन कर रहे कर्मियों का आरोप है कि उनसे पहले 12 घंटे तक काम लिया जाता था, जो श्रम नियमों के विपरीत है, जबकि भुगतान केवल 26 दिन का किया जाता था। वर्तमान में उन्हें निर्धारित 424 रुपये प्रतिदिन के बजाय मात्र 300 रुपये दिए जा रहे हैं। कर्मियों का कहना है कि नई टेंडर प्रक्रिया का हवाला देकर 21 दिसंबर से उनका काम रोक दिया गया, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
कर्मचारियों के अनुसार, कुछ लोगों से कम दर पर काम कराया जा रहा है, जबकि बाकी को पूरी तरह काम से बाहर कर दिया गया है। लगभग 38 प्रभावित कर्मियों का कहना है कि कई बार अधिकारियों और ठेकेदार से गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे परेशान होकर अब वे सत्याग्रह के माध्यम से अपनी मांगों को उठा रहे हैं। धरनास्थल पर मौजूद कर्मियों ने बताया कि वे 8 घंटे की ड्यूटी (सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे तक) और पूरे 30 दिन का वेतन लागू करने की मांग कर रहे हैं।
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साथ ही बकाया वेतन का तत्काल भुगतान और काम पर बहाली भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। संघ के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि यह आंदोलन कर्मचारियों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई है, जिसे किसी भी कीमत पर दबाया नहीं जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
कर्मचारियों ने घोषणा की है कि 25 तारीख से सुबह 10 बजे से दो-दो लोगों द्वारा 24 घंटे का क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
ओबरा के सी परियोजना गेट पर जारी यह सत्याग्रह अब प्रशासन और प्रबंधन के लिए चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते असंतोष को देखते हुए समय रहते समाधान न निकला तो आंदोलन व्यापक रूप ले सकता है।