क्या लोध राजपूत विधानसभा चुनाव में बिगाड़ देंगे बीजेपी का खेल, नाराजगी की क्या वजह निकलकर आई सामने?

उत्तर प्रदेश की सियासी हवा में ओबीसी वर्ग की लोध बिरादरी में बढ़ती नाराजगी ने बीजेपी के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। सांसद साक्षी महाराज के हालिया बयानों ने इस असंतोष को और हवा दी है। क्या यह सिर्फ अंदरूनी खींचतान है या आने वाले चुनावों में असर डाल सकती है?

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 2 April 2026, 3:13 PM IST

Lucknow: बीजेपी के सबसे वफादार लोध वोट बैंक में पनप रही नाराजगी और सांसद साक्षी महाराज के बयानों ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। उत्तर प्रदेश में बीजेपी का आधार माने जाने वाले ओबीसी वर्ग की लोध बिरादरी में इन दिनों भारी नाराजगी देखी जा रही है।

दरअसल, लोध वह जाति है जो कल्याण सिंह के दौर से लेकर अब तक बीजेपी के साथ एक चट्टान की तरह खड़ी रही है, लेकिन हालिया घटनाक्रम और सांसद साक्षी महाराज के बयानों ने संकेत दिया है कि अब इस रिश्ते में दरार आ रही है।

क्या BJP से छिटक रहा है लोध वोट बैंक ?

साक्षी महाराज ने हाल ही में बयान दिया और भावुक स्वर में कहा कि, जिस समाज ने बीजेपी को फर्श से अर्श तक पहुंचाया, आज उसे ही अपनी पहचान और सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कासगंज (कल्याण सिंह का मूल निवास) में प्रशासन पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की मूर्ति तक लगाने में रोड़े अटका रहा है। साक्षी महाराज ने स्पष्ट किया कि, लोध समाज महसूस कर रहा है कि सत्ता और संगठन में उन्हें वह 'सम्मानजनक साझेदारी' नहीं मिल रही है, जिसके वे हकदार हैं।

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महोबा से लेकर एटा तक बदल रहे समीकरण

लोधों की इस नाराजगी का असर 2024 के लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिला है। फिरोजाबाद और एटा जैसी सीटों पर समाजवादी पार्टी ने सेंधमारी की है। महोबा की चरखारी सीट से बीजेपी विधायक बृजभूषण राजपूत का अपनी ही सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के साथ सड़क पर भिड़ना इस असंतोष का जीता-जागता उदाहरण है।

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दूसरी तरफ, बिरादरी के नेताओं का मानना है कि बीजेपी उन्हें वोट बैंक की तरह इस्तेमाल तो कर रही है, लेकिन जब बात प्रतिनिधित्व की आती है चाहे वह मंत्री पद हो, राज्यपाल की नियुक्ति हो या अन्य महत्वपूर्ण पद तो उन्हें पीछे छोड़ दिया जाता है।

Location : 
  • Lucknow

Published : 
  • 2 April 2026, 3:13 PM IST