नोएडा सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की डूबकर मौत के मामले में पुलिस ने दो और बिल्डरों को गिरफ्तार किया है। NGT ने भी नोएडा प्राधिकरण समेत कई विभागों से जवाब मांगा है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता का फाइल फोटो
Noida: नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे सिस्टम की लापरवाही को बेनकाब कर दिया है। निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में भरे पानी में डूबकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद अब पुलिस और जांच एजेंसियां एक्शन मोड में हैं। जिस मौत ने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी, उसी मामले में ग्रेटर नोएडा पुलिस ने दो और बिल्डरों को गिरफ्तार कर बड़ा कदम उठाया है। अब तक 3 बिल्डर इस मामले में जेल जा चुके हैं।
5 के खिलाफ मुकदमा दर्ज
नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने इस मामले में लोटस ग्रीन के बिल्डर रवि बंसल और सचिन कर्णवाल को गिरफ्तार किया है। इससे पहले विश टाउन के बिल्डर अभय कुमार को पुलिस जेल भेज चुकी है। कुल 5 बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिनमें से अब 3 की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि लापरवाह बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
NGT ने भी दिखाई सख्ती
मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी हस्तक्षेप किया है। NGT ने नोएडा प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिंचाई विभाग, पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव और गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी को प्रतिवादी बनाते हुए जवाब मांगा है। सभी को निर्देश दिया गया है कि 10 अप्रैल 2026 को होने वाली अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले हलफनामा दाखिल किया जाए।
कैसे हुआ दर्दनाक हादसा
नॉलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र में सेक्टर-150 के एटीएस ली-ग्रैंडिओस मोड़ के पास हुआ। गुरुग्राम से ड्यूटी कर घर लौट रहे 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार घने कोहरे और तेज रफ्तार के कारण अनियंत्रित हो गई। कार नाले की दीवार तोड़ते हुए निर्माणाधीन मॉल के उस बेसमेंट में जा गिरी, जिसमें करीब 30 फीट तक पानी भरा था।
पिता से आखिरी कॉल, चार घंटे चला रेस्क्यू
डूबने से पहले युवराज ने अपने पिता राजकुमार मेहता को फोन कर बताया कि वह डूब रहा है और उसे बचा लें। पिता 15 मिनट में मौके पर पहुंच गए और पुलिस भी तुरंत आ गई। लेकिन अंधेरा, कोहरा और पानी की गहराई सबसे बड़ी बाधा बन गई। दमकल विभाग, SDRF और बाद में NDRF ने करीब साढ़े चार घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। युवराज बीच-बीच में मोबाइल की टॉर्च जलाकर मदद मांगता रहा, लेकिन रात 1:45 बजे वह कार समेत पानी में डूब गया। बाद में उसे बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक के पिता ने तहरीर में आरोप लगाया है कि घटनास्थल पर न तो बैरिकेडिंग थी और न ही रिफ्लेक्टर लगे थे। पुलिस अब इसी लापरवाही को आधार बनाकर बिल्डरों की जिम्मेदारी तय करने में जुटी है।