मुजफ्फरनगर के रोनी हरजीपुर गांव में स्वर्ण समाज के ग्रामीणों ने पीएम मोदी के नाम खून से खत लिखा। वे यूजीसी कानून के विरोध में हैं और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए कानून को तुरंत वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने पीएम को लिखा खून से खत
Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में यूजीसी कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन बढ़ते ही जा रहे हैं। स्वर्ण समाज के लोग लगातार इस कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। बुधवार को रोनी हरजीपुर गांव में ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम अपने खून से एक खत लिखा, जिसमें उन्होंने इस कानून के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
स्वर्ण समाज का कहना है कि यूजीसी कानून हिंदू समाज के बच्चों के साथ भेदभाव कर रहा है और समाज में आपसी भाईचारे को कमजोर करने का काम कर रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि हम सभी यहां पर मिलजुलकर रहते हैं, लेकिन सरकार इस कानून के माध्यम से हमें आपस में लड़ाने का प्रयास कर रही है। इसे हम किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
अंकुर राणा, एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा, "नमस्कार, भारत माता की जय, वंदे मातरम। यह यूजीसी कानून हमारे बच्चों के भविष्य के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। यह कानून हमारे छात्रों को भेदभाव और अन्याय के दायरे में ला रहा है। हम चाहते हैं कि हमारे बच्चों को समान अवसर मिलें और शिक्षा का अधिकार सुरक्षित रहे।'
प्रदर्शन की एक अनूठी और चौंकाने वाली विशेषता यह रही कि ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत अपने खून से लिखा। उन्होंने कहा कि यह खत उनके बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए लिखा गया। ग्रामीणों का मानना है कि सरकार हिंदू समाज को बांटने का काम कर रही है, जबकि यह कानून हमें एकजुट रहने का मौका छीन रहा है।
ग्रामीणों ने खत में लिखा कि "जो भी सरकार हिंदू समाज के बीच भेदभाव करेगी, उसका हम पुरजोर विरोध करेंगे। हमारे गांव में अन्य बिरादरी भी रहती है और हम सभी मिलजुलकर रहते हैं। लेकिन यह कानून हमारे बीच झगड़ा और वैमनस्य पैदा करने का काम कर रहा है, जिसे हम सहन नहीं करेंगे।"
स्वर्ण समाज के लोग खासतौर पर अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि इस कानून के कारण स्वर्ण समाज के छात्र शिक्षा और विकास के समान अवसरों से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि शिक्षा को भेदभाव और जातिवाद से मुक्त रखा जाए।
अंकुर राणा ने कहा, "हमने यह खत अपने रक्त से लिखा है, ताकि सरकार को हमारे दर्द का एहसास हो। हम चाहते हैं कि हमारे बच्चों को भेदभाव से बचाया जाए और उनके उज्जवल भविष्य के लिए सही निर्णय लिया जाए।"
ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि यूजीसी कानून को तुरंत वापस लिया जाए और शिक्षा के अधिकार को समान रूप से सभी छात्रों के लिए सुरक्षित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को बांटने या जातिवाद फैलाने वाली किसी भी नीति का वे विरोध करेंगे।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वह समाज को एकजुट रखने के लिए कदम उठाएं और युवाओं के भविष्य के लिए यह सुनिश्चित करें कि कोई भी भेदभावपूर्ण कानून लागू न हो।
इस प्रदर्शन के बाद यह साफ है कि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण, विशेषकर स्वर्ण समाज, इस कानून के खिलाफ अपनी आवाज उठाने में संकोच नहीं कर रहे हैं और इसके खिलाफ सशक्त विरोध जारी रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।