22 कांवड़िए साथ चले, लेकिन सबकी नजरें सिर्फ इस एक कांवड़ पर टिक गईं… वजह जानकर आप भी कहेंगे- आज भी जिंदा है ‘श्रवण कुमार’

मुज़फ्फरनगर में कांवड़ यात्रा 2026 के दौरान हापुड़ निवासी प्रशांत राणा अपनी दादी शारदा देवी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकले। शिव चौक पर यह अनोखी 'श्रवण कांवड़' श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही और बुजुर्गों की सेवा का प्रेरक संदेश देती नजर आई।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 31 July 2026, 10:22 AM IST

Muzaffarnagar: कांवड़ यात्रा 2026 के दौरान शुक्रवार सुबह मुज़फ्फरनगर के ऐतिहासिक शिव चौक पर एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली, जिसने हर श्रद्धालु का दिल जीत लिया। हापुड़ निवासी शिवभक्त प्रशांत राणा अपने भाई के साथ अपनी दादी शारदा देवी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इस अनोखी 'श्रवण कांवड़' को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

दादी को गंगा स्नान कराने का था सपना

प्रशांत राणा ने बताया कि उनकी इस यात्रा के पीछे कोई व्यक्तिगत मनोकामना नहीं है। उनका उद्देश्य केवल अपनी दादी को हरिद्वार में गंगा स्नान कराना और उन्हें कांवड़ यात्रा का अनुभव कराना था। उन्होंने कहा कि भगवान शिव से उनकी बस यही प्रार्थना है कि परिवार में सुख-शांति बनी रहे और उनकी दादी को लंबी आयु एवं उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त हो।

संतुलन के लिए दोनों पलड़ों में बराबर वजन

प्रशांत ने बताया कि उनकी दादी का वजन करीब 45 किलोग्राम है। इसलिए कांवड़ के दूसरे पलड़े में भी लगभग 45 किलोग्राम वजन रखा गया है, जिसमें गंगाजल, कलश और पूजा सामग्री शामिल है। इसी संतुलन के साथ वह पूरी यात्रा कर रहे हैं। उनकी टोली में कुल 22 शिवभक्त शामिल हैं, लेकिन दादी को कांवड़ में बैठाकर यात्रा करने वाले केवल वही और उनके भाई हैं।

दादी बोलीं- बुजुर्गों की सेवा सबसे बड़ा धर्म

कांवड़ में बैठी शारदा देवी ने अपने पौते की सेवा भावना पर खुशी जताते हुए कहा कि हर युवा को अपने माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है और यही भारतीय संस्कृति की असली पहचान है।

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रास्ते भर लोगों ने की सराहना

श्रवण कांवड़ को देखने के लिए रास्ते भर श्रद्धालु रुकते रहे। कई लोगों ने प्रशांत और उनकी दादी के साथ फोटो और वीडियो भी बनाए। शिव चौक पर यह अनोखा दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। आस्था, सेवा और संस्कार का यह संगम कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का संदेश बन गया।

Location :  Muzaffarnagar

Published :  31 July 2026, 10:21 AM IST