“सड़क पर बहता पानी और ढहती दीवारें!” मिर्जापुर में साईफन टूटने से भारी जलभराव, सहकारिता समिति डूबी

साइफन हटने के बाद बिगड़ी जल निकासी व्यवस्था और भारी बारिश ने बढ़ाई मुश्किल, बाढ़ का पानी समिति भवन तक पहुंचा तो पिछली दीवार में भी पड़ गई दरार। पढ़ें पूरी खबर

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 8 September 2026, 4:17 PM IST

Mirzapur: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच गड़ई नदी का जलस्तर बढ़ने और अहरौरा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद हसौली क्षेत्र में जलभराव की स्थिति गंभीर हो गई है। बाढ़ का पानी ओड़ी साधन सहकारी समिति लिमिटेड के परिसर में पहुंच गया। कार्यालय, गोदाम, स्टोर रूम और आसपास का पूरा कैंपस पानी से घिर गया है। कई दिनों से भवन के पीछे पानी जमा रहने के कारण उसकी पिछली दीवार में भी दरार पड़ गई है।

जल निकासी व्यवस्था बाधित होने से बढ़ी परेशानी

बताया गया कि बरसात के दौरान गड़ई नदी के ओवरफ्लो होने पर बाढ़ के पानी को निकालने के लिए अहरौरा बांध से संचालित बेलहर राजवाहा के जरिए निकासी की व्यवस्था की गई थी। हसौली गांव के पास साइफन बनाकर पानी को आगे निकालने का रास्ता तैयार किया गया था, लेकिन समय के साथ इस व्यवस्था में दिक्कतें आने लगीं।

कूड़ा फंसने की शिकायत पर तोड़ा गया साइफन

स्थानीय स्तर पर साइफन में बार-बार कूड़ा और गंदगी जमा होने से पानी के आवागमन में रुकावट की शिकायत की जाती रही। इसके बाद सिंचाई विभाग ने साइफन को तोड़कर वहां खुली नहर बना दी। आरोप है कि इसके बाद बाढ़ के पानी की निकासी की पुरानी व्यवस्था प्रभावित हो गई और पानी के बाहर निकलने का रास्ता बाधित हो गया।

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हसौली और करजी गांव भी जलमग्न

अत्यधिक बारिश के दौरान गड़ई नदी का पानी बढ़ने पर हसौली और करजी गांव के आसपास भी जलभराव हो गया। इसी जलभराव की चपेट में ओड़ी साधन सहकारी समिति का परिसर भी आ गया। समिति के भवन के चारों ओर पानी जमा है, जबकि पीछे लंबे समय से पानी ठहरा होने के कारण दीवार को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है।

पिछले साल भी बर्बाद हुआ था लाखों का खाद

समिति के सचिव बाबूलाल सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष भी बारिश और बाढ़ का पानी समिति परिसर में घुस गया था। उस दौरान गोदाम में रखा लाखों रुपये का रासायनिक खाद खराब हो गया था। उन्होंने बताया कि इस बार पहले से ही बाढ़ की आशंका को देखते हुए खाद, बीज और अन्य जरूरी सामान को सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया गया था। इसलिए इस बार सामग्री के नुकसान से बचाव हो गया।

पुराने नुकसान का बीमा भुगतान अब तक नहीं

सचिव के मुताबिक, पिछले साल हुए नुकसान का बीमा कराया गया था और बीमा कंपनी के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर क्षति का आकलन भी किया था। इसके बावजूद अब तक बीमा की राशि समिति को नहीं मिल सकी है। उन्होंने संबंधित स्तर पर जल्द भुगतान की मांग की है।

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जर्जर भवन को लेकर भी जताई चिंता

अन्नदाता मंच के संयोजक चौधरी रमेश सिंह ने समिति भवन की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पिछले साल हुई क्षति का मुआवजा जल्द दिया जाना चाहिए और भवन की तत्काल मरम्मत कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि लगातार पानी जमा रहने से भवन कमजोर हो रहा है और समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

जल निकासी की स्थायी व्यवस्था की जरूरत

बारिश के दौरान बार-बार सामने आ रही जलभराव की समस्या ने क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि बाढ़ के पानी की निकासी के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था जरूरी है, ताकि गांवों के साथ-साथ सरकारी और सहकारी संस्थानों को भी नुकसान से बचाया जा सके।

Location :  Mirzapur

Published :  8 September 2026, 4:17 PM IST