
पूर्व IAS दिव्या मित्तल के दौरे में उमड़ी भीड़
Mirzapur: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद की पूर्व जिलाधिकारी एवं IAS अधिकारी रहीं दिव्या मित्तल का प्रभाव आज भी जिले के लोगों के बीच साफ दिखाई देता है। हाल ही में तीन दिन के मिर्जापुर प्रवास के दौरान उनसे मिलने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। किसानों से लेकर आम नागरिकों और दूरदराज के गांवों के लोगों तक में उनसे मिलने की उत्सुकता दिखाई दी।
दिव्या मित्तल के इस दौरे के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कुछ लोगों के बीच यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दिव्या मित्तल की बढ़ती लोकप्रियता का कोई राजनीतिक अर्थ निकाला जा सकता है। हालांकि, दिव्या मित्तल की ओर से राजनीति में आने या चुनाव लड़ने को लेकर कोई सार्वजनिक संकेत नहीं दिया गया है।
मिर्जापुर प्रवास के दौरान दिव्या मित्तल लोगों से लगातार मिलती रहीं। उन्हें बार-बार यह बताना पड़ा कि वह केवल तीन दिन के लिए जिले में आई हैं, लेकिन इसके बावजूद अलग-अलग क्षेत्रों से लोग उनसे मिलने पहुंचते रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिव्या मित्तल के कार्यकाल के दौरान उनके बीच पहुंचकर समस्याएं सुनना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा था। यही कारण है कि प्रशासनिक पद से मिर्जापुर से जाने के बाद भी बड़ी संख्या में लोग उनसे जुड़ाव महसूस करते हैं।
कई लोगों ने उन्हें अपनी बेटी और बहन की तरह बताया। लोगों का कहना है कि उनसे मिलने के दौरान कभी यह महसूस नहीं हुआ कि वे किसी बड़े प्रशासनिक पद पर हैं। आम लोगों के बीच सहज तरीके से बैठकर उनकी समस्याएं सुनना उनकी पहचान बन गया था।
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दिव्या मित्तल के मिर्जापुर कार्यकाल की सबसे चर्चित उपलब्धियों में ड्रमंडगंज क्षेत्र की पहाड़ियों पर स्थित लहुरियादह गांव की पेयजल समस्या का समाधान शामिल रहा।
मिर्जापुर जिला मुख्यालय से करीब 65 किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र में बसे लहुरियादह गांव में लंबे समय तक स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या रही। स्थानीय लोगों के अनुसार गांव में पीने योग्य पानी के पर्याप्त स्रोत उपलब्ध नहीं थे।
ग्रामीण पहाड़ों से निकलने वाले झरनों और बारिश के पानी पर निर्भर रहते थे। बारिश के पानी को तालाबों और अन्य स्थानों पर एकत्र कर उपयोग किया जाता था। गर्मी के मौसम में जब स्थानीय जल स्रोत सूख जाते थे तो पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता था।
ग्रामीणों के अनुसार कई बार टैंकर समय पर नहीं पहुंचने या रास्ते में खराब हो जाने के कारण लोगों को दूरदराज के इलाकों से पानी लाना पड़ता था। पानी की समस्या से सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को होती थी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब तत्कालीन अधिकारी दिव्या मित्तल को लहुरियादह की पेयजल समस्या की जानकारी मिली तो उन्होंने मामले का संज्ञान लिया और पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कार्रवाई शुरू कराई।
बाद में गांव में लोगों के घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने की व्यवस्था की गई। स्थानीय लोगों की मांग पर दिव्या मित्तल स्वयं भी गांव पहुंचीं और पेयजल योजना के शुभारंभ में शामिल हुईं।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पुरानी पानी की समस्या के समाधान के बाद दिव्या मित्तल के प्रति लोगों के मन में विशेष सम्मान और लगाव पैदा हुआ। आज भी गांव के लोग उस कार्य को उनके प्रशासनिक कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताते हैं।
दिव्या मित्तल के कार्यकाल के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी काम किया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता और किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुना जाता था।
इसके अलावा विंध्य कॉरिडोर, चुनार क्षेत्र में सड़कों के चौड़ीकरण और अन्य विकास योजनाओं को लेकर भी उनके कार्यकाल की चर्चा होती रही। प्रशासनिक स्तर पर विकास कार्यों की निगरानी और जनता से सीधे संवाद उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था।
दिव्या मित्तल के मिर्जापुर से तबादले के बाद भी स्थानीय लोगों में उनके प्रति लगाव बना रहा। हाल के तीन दिवसीय प्रवास के दौरान इसका असर एक बार फिर दिखाई दिया, जब अलग-अलग क्षेत्रों से लोग उनसे मिलने पहुंचे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके जाने के बाद भी लोग उन्हें याद करते रहे और जब उनके मिर्जापुर आने की सूचना मिली तो कई लोग उनसे मिलने के लिए पहुंच गए।
हालांकि, दिव्या मित्तल के तबादले को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक कारणों से जुड़े कई तरह के दावे और चर्चाएं होती रही हैं। इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उन्हें राजनीतिक चर्चाओं और स्थानीय धारणाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दिव्या मित्तल के हालिया दौरे और लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी के बाद जिले में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग उनकी लोकप्रियता को भविष्य की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या वह कभी सक्रिय राजनीति में कदम रखेंगी।
हालांकि, वर्तमान में दिव्या मित्तल की ओर से चुनाव लड़ने, किसी राजनीतिक दल से जुड़ने या 2027 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल इन चर्चाओं को स्थानीय राजनीतिक कयासों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
मिर्जापुर प्रवास के दौरान दिव्या मित्तल ने मां विंध्यवासिनी के दर्शन भी किए। स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने किसी विशेष VIP व्यवस्था के बजाय सामान्य श्रद्धालुओं की तरह दर्शन किया।
दर्शन के बाद उन्होंने मिर्जापुर के लोगों से मिले स्नेह और अपनापन को लेकर कहा कि उन्हें यहां उम्मीद से भी ज्यादा प्यार मिला है।
दिव्या मित्तल के तीन दिवसीय प्रवास ने एक बार फिर यह साफ कर दिया कि मिर्जापुर के लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता और प्रशासनिक कार्यशैली की चर्चा आज भी जारी है। लहुरियादह की पेयजल व्यवस्था से लेकर किसानों और आम लोगों की समस्याओं को सुनने तक, उनके कार्यकाल से जुड़े कई काम आज भी स्थानीय लोगों की यादों में हैं।
फिलहाल 2027 की राजनीति को लेकर उठ रही चर्चाओं पर कोई आधिकारिक आधार सामने नहीं आया है, लेकिन दिव्या मित्तल के मिर्जापुर दौरे में उमड़ी भीड़ ने इतना जरूर दिखाया कि जिले के एक बड़े वर्ग के बीच उनके प्रति सम्मान और जुड़ाव अब भी कायम है।
Location : Mirzapur
Published : 30 August 2026, 6:21 PM IST
Topics : Divya Mittal IAS Former IAS Divya Mittal Mirzapur Politics mirzapur news UP Assembly Election 2027