मनरेगा में फर्जी हाजिरी पर बीडीओ संतोष कुमार यादव का आदेश सवालों के घेरे में, एडमिन आईडी से अप्रूवल किसका और जवाबदेही किसकी?

महराजगंज के निचलौल ब्लॉक में मनरेगा के तहत क्लोन ऐप से कथित फर्जी हाजिरी दर्ज किए जाने की शिकायतों के बीच खंड विकास अधिकारी संतोष कुमार यादव का आदेश चर्चा में है। मामला सामने आने के बाद अब कार्यस्थलों पर रोजाना निगरानी होगी और ऐप में दर्ज हाजिरी का मौके पर मौजूद श्रमिकों से मिलान किया जाएगा।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 16 October 2026, 12:27 AM IST

Maharajganj: बीवी जी रामजी यानी मनरेगा में श्रमिकों की कथित फर्जी हाजिरी दर्ज किए जाने की शिकायतों ने निचलौल ब्लॉक की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खंड विकास अधिकारी संतोष कुमार यादव की ओर से जारी आदेश में कार्यस्थलों का प्रतिदिन निरीक्षण करने और एनएमएमएस (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) ऐप पर दर्ज उपस्थिति का मौके पर मौजूद श्रमिकों से मिलान करने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, इस आदेश के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब उपस्थिति की निगरानी और प्रशासनिक नियंत्रण में बीडीओ की एडमिन आईडी की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है, तो फिर निगरानी की जिम्मेदारी उन्हीं मैदानी कर्मचारियों को क्यों सौंपी गई है, जिनकी भूमिका की जांच की आवश्यकता पड़ सकती है?

12 अक्टूबर को जारी हुआ निरीक्षण का आदेश

खंड विकास अधिकारी निचलौल की ओर से 12 अक्टूबर 2026 को जारी पत्रांक 1074/श्रमिक/वीबीजी रामजी/2026-27 में अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारियों, ग्राम विकास अधिकारियों, तकनीकी सहायकों और ग्राम रोजगार सेवकों को प्रतिदिन कार्यस्थलों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है।

आदेश के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान मौके पर मौजूद श्रमिकों की संख्या और उनके नाम का एनएमएमएस ऐप पर दर्ज उपस्थिति से मिलान किया जाएगा। यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि हाजिरी केवल उन्हीं श्रमिकों की दर्ज हो, जो वास्तव में कार्यस्थल पर मौजूद रहकर काम कर रहे हैं।

क्लोन ऐप से हाजिरी दर्ज करने की शिकायत

आदेश में उल्लेख किया गया है कि वीबी-जी राम जी योजना के तहत श्रमिकों को 125 दिन काम का अधिकार दिए जाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एनएमएमएस आधारित उपस्थिति तथा कार्यस्थलों की जियोटैगिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं। इसके बावजूद शिकायतें मिल रही हैं कि कार्यस्थलों पर ऐप में दर्ज श्रमिकों की संख्या के मुकाबले वास्तविक रूप से काम करने वाले श्रमिकों की संख्या कम है।

इसके साथ ही क्लोन ऐप अथवा एआई आधारित तकनीक के कथित दुरुपयोग से उपस्थिति दर्ज किए जाने की शिकायतों का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, इन शिकायतों की वास्तविकता और किसी कर्मचारी की संलिप्तता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

बीडीओ ने आदेश में चेतावनी दी है कि यदि वास्तविक श्रमिकों और ऐप पर दर्ज उपस्थिति के नाम या संख्या में अंतर मिलता है अथवा मिलीभगत से तकनीक का दुरुपयोग कर हाजिरी दर्ज करने का मामला सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। साथ ही निर्धारित एसओपी के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

एडमिन आईडी से अप्रूवल, तो जवाबदेही भी हो तय

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल एडमिन आईडी के अधिकारों और उपस्थिति को स्वीकृति देने की प्रक्रिया को लेकर है। यदि इस प्रक्रिया में बीडीओ की एडमिन आईडी की भूमिका है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि आईडी का इस्तेमाल किस स्तर पर और किस उद्देश्य से किया जाता है। क्या इसके माध्यम से उपस्थिति को स्वीकृति दी जाती है, या इसका उपयोग केवल प्रशासनिक नियंत्रण और निगरानी के लिए होता है?

तकनीकी व्यवस्था और अधिकारों की स्पष्ट जानकारी के बिना यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि कथित फर्जी हाजिरी के लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है। लेकिन यही कारण है कि मामले की निष्पक्ष जांच में एडमिन आईडी के अधिकारों, अप्रूवल रिकॉर्ड और डिजिटल लॉग की भूमिका स्पष्ट करना जरूरी है।

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यदि शिकायतों में मैदानी स्तर पर अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है, तो केवल उन्हीं कर्मचारियों को निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपना पर्याप्त होगा या नहीं, यह भी विचारणीय है। ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी, तकनीकी सहायक और ग्राम रोजगार सेवक निरीक्षण करेंगे, लेकिन शिकायतों की निष्पक्ष पुष्टि के लिए स्वतंत्र सत्यापन की व्यवस्था कितनी प्रभावी होगी?

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या निरीक्षण के साथ किसी स्वतंत्र अधिकारी या तकनीकी टीम से भी सत्यापन कराया जाएगा? क्या संदिग्ध कार्यस्थलों के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच होगी? और क्या उपस्थिति दर्ज करने से लेकर उसकी स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण किया जाएगा?

सिर्फ निरीक्षण से कैसे रुकेगी फर्जी हाजिरी?

प्रतिदिन निरीक्षण और नामवार मिलान से अनियमितताओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है, लेकिन क्लोन ऐप के कथित इस्तेमाल की पुष्टि के लिए तकनीकी जांच भी महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड, फोटो, जियोटैग और उपलब्ध अप्रूवल लॉग की जांच आवश्यक हो सकती है।

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अब निगाह इस बात पर है कि निचलौल ब्लॉक में जारी आदेश के बाद केवल मैदानी कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय होगी या एडमिन आईडी से जुड़ी व्यवस्था और पूरी उपस्थिति प्रणाली की भी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।

Location :  Maharajganj

Published :  16 October 2026, 12:21 AM IST