डाइनामाइट न्यूज़ को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। शिष्य की पिटाई और उसके त्याग की कहानी ने पूरे आंदोलन को झकझोर दिया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इंटरव्यू में खोला एक चौंकाने वाला राज
Prayagraj: डाइनामाइट न्यूज़ को दिए गए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने योगी सरकार, संतों की स्थिति, पुलिस कार्रवाई और सत्ता के रवैये पर खुलकर अपनी बात रखी। इंटरव्यू के दौरान कई ऐसे भावुक और तीखे क्षण आए, जिन्होंने पूरे आंदोलन की पीड़ा को सामने ला दिया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संतों की शक्ति को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि साधु-संतों की ताकत किसी शारीरिक बल में नहीं, बल्कि उनके मन की पवित्रता और आत्मिक बल में होती है। उन्होंने कहा,
"आज लोग सोचते हैं कि साधु-संत में कोई अलग ही शक्ति होती हैं, लेकिन उनकी असली शक्ति उनका संयम, त्याग और सत्य के प्रति निष्ठा होती है।"
इंटरव्यू का सबसे पीड़ादायक और भावुक क्षण तब आया जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने एक शिष्य के साथ हुई बर्बरता का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान जब उन्होंने अपने शिष्य को देखा तो उसकी आंखें सूजी हुई थीं और आंसू बह रहे थे।
स्वामी ने शिष्य को पास बुलाकर पूछा, "क्या किसी ने तुम्हें मारा है?"
इस पर शिष्य ने जवाब दिया, "नहीं, मुझे किसी ने नहीं मारा।"
बाद में जब सच्चाई सामने आई तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बेहद आहत हो गए। उन्हें पता चला कि उनके उसी शिष्य को पुलिस द्वारा मारा-पीटा गया था। स्वामी ने कहा, "उस शिष्य ने मौके की नजाकत को समझते हुए मुझसे झूठ बोला। उसने अपने ऊपर आई पीड़ा को इसलिए छिपा लिया ताकि कोई विवाद न हो जाए।" उन्होंने इसे संत परंपरा का सर्वोच्च उदाहरण बताया, जहां व्यक्तिगत कष्ट से ऊपर समाज की शांति को रखा गया।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का इंटरव्यू बना सियासी तूफान
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बेहद कठोर शब्दों में कहा कि जो संत हिंसा नहीं करता, विरोध नहीं करता और फिर भी अत्याचार सहता है, उसे पीटना सबसे बड़ा अन्याय है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार संतों के सम्मान की बात करती है और दूसरी तरफ उन्हीं संतों और उनके शिष्यों पर पुलिस लाठियां बरसाती है।
इंटरव्यू में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उत्तर प्रदेश में अब असहमति की कोई जगह नहीं बची है? उन्होंने कहा कि सत्ता का यह रवैया लोकतांत्रिक नहीं बल्कि दमनकारी है, जो संत समाज को भी नहीं बख्श रहा।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रधानमंत्री को लेकर भी अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश के शीर्ष नेतृत्व को यह देखना चाहिए कि उनके शासन में साधु-संतों के साथ कैसा व्यवहार हो रहा है। उन्होंने अपील की कि सत्ता अहंकार छोड़कर संवेदनशीलता दिखाए।
इंटरव्यू के अंत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट कहा कि संत समाज डरने वाला नहीं है। अन्याय के खिलाफ आवाज उठती रहेगी और यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज होगा। डाइनामाइट न्यूज़ को दिया गया यह इंटरव्यू राजनीतिक हलकों में हलचल मचा रहा है।