
नहीं रहे सपा के दिग्गज नेता रामगोविंद चौधरी
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रतिपक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री रामगोविंद चौधरी का शुक्रवार को PGI लखनऊ में निधन हो गया। उन्होंने 74 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से समाजवादी पार्टी और सियासी गलियारे में शोक की लहर पैदा हो गई।
जानकारी के अनुसार पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था। उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। वह कई दिनों से PGI में पोस्टऑपरेटिव आईसीयू में भर्ती थे।
एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ. आरके धीमन ने रामगोविंद चौधरी के निधन की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि उन्हें मधुमेह, उच्च रक्तचाप समेत कई स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें थीं। हालत गंभीर होने के बाद उन्हें पीजीआई में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।
बलिया सहित पूरे पूर्वांचल में उनके समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री राम गोविंद चौधरी जी का निधन, अत्यंत दुःखद !
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि ! pic.twitter.com/8GeCP8UcpT
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) September 25, 2026
राम गोविंद चौधरी बलिया के रहने वाले थे। उनका जन्म 7 सितंबर 1953 को गोसाईपुर गांव में हुआ था। उन्होंने 1977 में पहली बार चिलकहर सीट से विधानसभा चुनाव जीता था। उन्होंने 1980, 1985,1989 और 1991 में विधायक चुने गए थे। इसके बाद बांसडीह सीट से वह चुनाव जीते। वे मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सरकार में मंत्री रहे। 2017 में वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चुने गए।
रामगोविंद चौधरी समाजवादी आंदोलन के बड़े चेहरों में शामिल रहे। वह लंबे समय तक उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे और बलिया जिले की बांसडीह विधानसभा सीट से अपनी मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और आठ बार विधायक रहे।
राम गोविंद चौधरी का सपा में बड़ा कद माना जाता है। चंद्रशेखर को राजनीतिक गुरु मानने वाले राम गोविंद चौधरी ने जनता पार्टी से अपने सियासी सफर का आगाज किया था। इसके बाद वह 2002 में तत्कालीन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के साथ आ गए।
मुलायम के साथ सपा की राजनीति करने वाले राम गोविंद चौधरी अखिलेश यादव के भी करीबी माने जाते हैं। 2017 विधानसभा चुनाव में जब सपा को शिकस्त मिली तो अखिलेश ने तमाम वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करते हुए उन्हें नेता विपक्ष की जिम्मेदारी देने का फैसला लिया। आठ बार के विधायक राम गोविंद चौधरी बलिया से आते थे।
रामगोविंद चौधरी के निधन पर समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गहरा दुख व्यक्त किया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि उनके जाने से समाजवादी आंदोलन को बड़ी क्षति हुई है। बलिया से लेकर लखनऊ तक उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल है।
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रामगोविंद चौधरी का राजनीतिक जीवन कई दशकों तक फैला रहा। उन्होंने गांव, किसान और आम जनता से जुड़े मुद्दों को अपनी राजनीति का केंद्र बनाया। उनके निधन से उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अनुभवी समाजवादी नेता का अध्याय समाप्त हो गया।
Location : Lucknow
Published : 25 September 2026, 10:34 PM IST