यूपी के राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह शुक्रवार से कुशीनगर के दौरे पर हैं। शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस कर सभागार में उन्होंने सरकार की उपलब्धियों को बीच प्रभावी ढंग से रखा। उन्होंने भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) विधेयक को ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया।

कुशीनगर में यूपी के राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह
Kushinagar: यूपी के राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह शुक्रवार से कुशीनगर के दौरे पर हैं। शनिवार को सभागार में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने संगठन की मजबूती एवं जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं से सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक प्रभावी रूप से पहुँचाने का आह्वान किया। इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
जनपद के प्रभारी मंत्री मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (VB G RAM G) विधेयक को ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया। प्रभारी मंत्री ने कहा कि यह विधेयक पुराने मनरेगा कानून की कमियों को दूर करते हुए ग्रामीण रोजगार, आय सुरक्षा और टिकाऊ अधोसंरचना को नई दिशा देगा।
दिनेश प्रताप सिंह जी ने बताया कि इस नए विधेयक के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु के इच्छुक ग्रामीण सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जबकि पहले यह सीमा 100 दिनों तक ही थी। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी और आजीविका अधिक सुरक्षित बनेगी।
उन्होंने कि नए कानून के अंतर्गत कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों—जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़े कार्य एवं जलवायु/मौसमी जोखिम कम करने वाले कार्यों तक सीमित किया गया है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। ग्राम पंचायतों द्वारा बनाए गए विकसित ग्राम पंचायत प्लान को अनिवार्य किया गया है तथा इन योजनाओं को पीएम गति शक्ति जैसी राष्ट्रीय प्रणालियों से जोड़ा जाएगा।
राज्य मंत्री ने कहा कि इस मिशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, रोजगार और आय के अवसर बढ़ेंगे, गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण होगा तथा पलायन में कमी आएगी। किसानों को सिंचाई, जल संरक्षण, भंडारण और बाजार तक बेहतर संपर्क सुविधाओं का लाभ मिलेगा, वहीं मजदूरों को 125 दिनों की गारंटी के साथ लगभग 25 प्रतिशत अधिक संभावित आय सुनिश्चित होगी।
प्रभारी मंत्री जी ने बताया कि मजदूरी का भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यम से आधार एवं बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए सीधे खातों में किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण रहेगा। यदि समय पर काम उपलब्ध नहीं कराया गया तो बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा।
मनरेगा को नए स्वरूप में बदलने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए मंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2005 की परिस्थितियों के अनुसार बना कानून आज की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं रह गया था। गरीबी दर में आई कमी, बेहतर संपर्क सुविधाएं और डिजिटल पहुंच को देखते हुए अधिक प्रासंगिक, मजबूत और जवाबदेह रोजगार गारंटी व्यवस्था की जरूरत थी, जिसे यह विधेयक पूरा करता है।
वित्तीय व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक राज्यों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालेगा। सामान्य राज्यों के लिए केंद्र-राज्य व्यय अनुपात 60:40, उत्तर-पूर्वी व हिमालयी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। आपदा की स्थिति में अतिरिक्त सहायता का भी प्रावधान रहेगा।
उन्होंने विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) को गांव, किसान और मजदूर—तीनों के हितों को संतुलित करते हुए ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार सिद्ध होगा।