
भक्ति में लीन फोटो देवी फोटो सोर्स-डाइनामाइट न्यूज
Kaushambi: “मैं छह साल की थी, तभी पिता गुजर गए। मां ने बड़ी मुश्किल से हम तीन बहनों की परवरिश की। गरीबी के कारण स्कूल का मुंह तक नहीं देख सकी। आज जो कुछ हूं, मां दुर्गा की कृपा और अपनी साधना की बदौलत हूं। भौतिक संसार में अविवाहित हूं, लेकिन पारलौकिक संसार में मेरी शादी मां से हो चुकी है।”
यह कहते हुए फोटो देवी उर्फ सिद्धेश्वरी दुर्गा अपनी साधना की कहानी सुनाती हैं। शारदीय नवरात्रि में नगर पालिका परिषद भरवारी के अमहा गांव में उनकी तपस्या लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। लोहे की कीलों से बनी शैया पर लेटना और कीलों वाले झूले पर झूलना उनकी साधना का हिस्सा है। दावा है कि वह नौ दिन से अन्न-जल ग्रहण किए बिना तपस्या कर रही हैं। उनके दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
प्रतापगढ़ जिले के पुन्नेमऊ गांव की रहने वाली फोटो देवी इन दिनों अपनी बहन के घर अमहा गांव में हैं। परिजनों के मुताबिक, वह पिछले करीब चार वर्षों से तपस्या कर रही हैं। नवरात्रि के दौरान उनकी साधना देखने के लिए दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। शाम होते ही गांव का माहौल भक्तिमय हो जाता है। मां दुर्गा के जयकारों के बीच श्रद्धालु उनके दर्शन करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।
फोटो देवी के जीवन की कहानी संघर्ष से शुरू होती है। बचपन में पिता का साया उठ गया। मां ने सीमित संसाधनों में तीन बेटियों को पालने की जिम्मेदारी निभाई। आर्थिक तंगी के कारण फोटो देवी पढ़ाई नहीं कर सकीं। अब वह अपनी जिंदगी को मां दुर्गा की भक्ति और साधना से जोड़कर देखती हैं।
फोटो उर्फ सिद्धेश्वरी दुर्गा के मुताबिक, करीब चार साल पहले वह गंभीर बीमारी से परेशान थीं। उनका कहना है कि इलाज कराने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिल रही थी। इसी दौरान मां दुर्गा उनके सपने में आईं और उन्हें तपस्या करने के लिए प्रेरित किया। महिला का दावा है कि इसके बाद उन्होंने मां की आराधना शुरू की और उनकी परेशानियां दूर हो गईं। तभी से उन्होंने साधना का रास्ता अपना लिया।
हालांकि, बीमारी और साधना के बीच संबंध को लेकर महिला का यह निजी अनुभव और दावा है। इसकी स्वतंत्र चिकित्सकीय पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
नवरात्रि में फोटो देवी की साधना का तरीका लोगों के बीच कौतूहल पैदा कर रहा है। वह लोहे की कीलों से बनी शैया पर लेटती हैं। इसके अलावा कीलों वाले झूले पर झूलकर भी तपस्या करती हैं। उनकी इस साधना को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुट रही है। श्रद्धालु उन्हें माता रानी का स्वरूप मानकर आस्था व्यक्त कर रहे हैं।
फोटो देवी का कहना है कि उनकी जिंदगी मां दुर्गा को समर्पित है। नौ दिनों की साधना के दौरान अन्न-जल त्यागने के उनके दावे के बीच उनकी तपस्या चर्चा में है। हालांकि, इतने लंबे समय तक बिना पानी के रहना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे में उनकी शारीरिक स्थिति और स्वास्थ्य की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।
अमहा गांव में नवरात्रि के दौरान आस्था, विश्वास और साधना का यह दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर फोटो देवी अपने संघर्षपूर्ण अतीत को याद करती हैं, तो दूसरी ओर मां दुर्गा के प्रति समर्पण को अपने जीवन का आधार बताती हैं। उनकी कहानी में बचपन की गरीबी, बीमारी से जूझने का अनुभव और धार्मिक आस्था के सहारे जीवन को नई दिशा देने का विश्वास झलकता है।
Location : Kaushambi
Published : 18 October 2026, 8:13 PM IST