
प्रतीकात्मक छवि
Lucknow: उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में अपनाई जा रही कंगारू मदर केयर (KMC) तकनीक समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले नवजात शिशुओं के लिए किसी जीवनदान से कम साबित नहीं हो रही है। इस पद्धति के जरिए सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि पिता, दादी और नानी भी नवजात को शरीर की गर्माहट देकर उसकी सेहत सुधारने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, इस विधि से नवजात बच्चों का वजन तेजी से बढ़ रहा है, स्तनपान बेहतर हो रहा है और उनकी सेहत में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है।
कंगारू मदर केयर यानी KMC एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें नवजात शिशु को टोपी, मोजे और लंगोट पहनाकर परिवार का सदस्य उसे अपने सीने से त्वचा-से-त्वचा संपर्क में रखता है। इससे बच्चे को प्राकृतिक गर्माहट, सुरक्षा और भावनात्मक जुड़ाव मिलता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार में कम से कम एक घंटे तक KMC देना सबसे अधिक लाभकारी माना जाता है। यह तकनीक विशेष रूप से उन बच्चों के लिए फायदेमंद है, जिनका जन्म समय से पहले हुआ हो या जिनका वजन 2500 ग्राम से कम हो।
King George's Medical University की प्रोफेसर डॉ. शालिनी त्रिपाठी ने बताया कि KMC बिना किसी अतिरिक्त खर्च के बेहद आसान और प्रभावी तरीका है। उनके मुताबिक यह विधि 90 फीसदी तक नवजातों की स्थिति सुधारने, वजन बढ़ाने और स्तनपान को बेहतर बनाने में मददगार साबित हो रही है।
वहीं डॉ. असद अली के अनुसार, उत्तर प्रदेश में हर 1000 नवजातों में लगभग 43 बच्चों का जन्म कम वजन के साथ होता है। ऐसे बच्चों की देखभाल चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन KMC तकनीक उनकी जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभा रही है।
प्रदेश में फिलहाल 314 KMC लाउंज स्थापित किए जा चुके हैं। वर्ष 2025-26 में करीब 93,158 नवजातों को इस पद्धति से लाभ मिला।
आगरा की रहने वाली मीनू के नवजात को प्रतिदिन आठ घंटे KMC की आवश्यकता थी, लेकिन शारीरिक कमजोरी के कारण वह यह पूरी तरह नहीं कर पा रही थीं। ऐसे में बच्चे की दादी मीरा और नानी नीलम ने जिम्मेदारी संभाली।
अस्पताल की नर्सों ने उन्हें KMC का प्रशिक्षण दिया। परिणाम यह रहा कि केवल चार दिनों में बच्चे का वजन 230 ग्राम बढ़ गया। अब बच्चा सक्रिय है और सामान्य रूप से स्तनपान भी कर रहा है।
Location : Lucknow
Published : 16 May 2026, 2:27 PM IST