जिला जज की अदालत में टली ज्ञानवापी मामले की सुनवाई, दोनों पक्षों को मिली अब नई तारीख

ज्ञानवापी परिसर के 1991 के मूल वाद की ट्रांसफर अर्जी से जुड़ी पुनर्विचार याचिका पर अब 20 जुलाई को अगली सुनवाई होगी। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद यह तिथि तय की। सोमवार की सुनवाई में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड अनुपस्थित रहा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 14 July 2026, 12:21 PM IST

Varanasi: ज्ञानवापी परिसर से जुड़े वर्ष 1991 के ऐतिहासिक मूल वाद को स्थानांतरित करने की याचिका पर एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत में सोमवार को इस मूल वाद के ट्रांसफर प्रार्थना पत्र से संबंधित पुनर्विचार (रिव्यू) याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने इस मामले में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों और तर्कों को विस्तार से सुना। इसके बाद, कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की अगली तारीख 20 जुलाई निर्धारित कर दी है।

ट्रांसफर अर्जी और खारिज होने का इतिहास

इस मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो मूल वाद वर्ष 1991 में दिवंगत पंडित सोमनाथ व्यास, दिवंगत पंडित रामरंग शर्मा और दिवंगत पंडित हरिहर पांडेय की तरफ से अदालत में प्रस्तुत किया गया था। वर्तमान समय में यह मूल वाद अधीनस्थ न्यायालय में लंबित चल रहा है। इस मामले में वादिनी पक्ष की सदस्य अनुष्का तिवारी ने ज्ञानवापी परिसर से जुड़े अन्य सभी विवादों के साथ इस मूल वाद को भी एक साथ समेकित (क्लब) करने की मांग की थी। इसके साथ ही याचिका में इसे मुख्य वाद घोषित करने का अनुरोध करते हुए स्थानांतरण (आवागमन) प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल किया गया था।

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हालांकि, जिला अदालत ने पूर्व की सुनवाई में वादिनी पक्ष के इस ट्रांसफर प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था। इसके बाद, इसी खारिज आदेश को चुनौती देते हुए कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई, जिस पर अभी सुनवाई चल रही है।

कोर्ट में दर्ज आपत्तियां

इस मामले की कानूनी प्रक्रिया के तहत पूर्व में ही विभिन्न पक्षों द्वारा अपनी आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष की ओर से विजय शंकर रस्तोगी और ज्ञानवापी मस्जिद की देखरेख करने वाली कमेटी अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से इस पुनर्विचार याचिका पर आपत्तियां पहले ही अदालत में प्रस्तुत की जा चुकी थीं।

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वहीं, सोमवार को हुई इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की तरफ से अदालत में कोई भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ और न ही उनकी तरफ से कोई उपस्थिति दर्ज कराई गई। अब सभी पक्षों की नजरें 20 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

Location :  Varanasi

Published :  14 July 2026, 12:21 PM IST