वन विभाग में वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर शासन ने मैनपुरी के डीएफओ संजय कुमार मल्ल को जिले से हटा दिया। नोट शीट में गड़बड़ी के आरोप में लिपिक अमित कुमार निलंबित, नए डीएफओ की तैनाती।

ऑफलाइन टेंडर मामले में बड़ी कार्रवाई
Mainpuri: विभागीय कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के मामले में शासन ने कड़ा कदम उठाया है। शिकायतों की पुष्टि होने के बाद मैनपुरी के डीएफओ संजय कुमार मल्ल को जिले से हटा दिया गया है। वहीं, लापरवाही बरतने के आरोप में विभाग के लिपिक अमित कुमार को निलंबित कर दिया गया है। डीएफओ को निलंबन अवधि में लखनऊ स्थित मुख्यालय से संबद्ध किया गया है।
बताया गया कि वन विभाग के विभिन्न कार्यों के लिए 17 जनवरी 2025 को बजट जारी किया गया था। बजट खर्च करने के लिए नियमानुसार जेम (GeM) पोर्टल से ऑनलाइन निविदाएं आमंत्रित की जानी थीं, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए ऑफलाइन टेंडर आमंत्रित कर लिए।
मामले की शिकायत सामने आने के बाद वन मंत्री अरुण सक्सेना ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। मंत्री के आदेश पर मुख्य वन संरक्षक झांसी मंडल एच.वी. ग्रीश के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की गई। टीम ने संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की गहन जांच की।
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जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बजट खर्च के लिए ऑफलाइन टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी, जो शासन के नियमों के विरुद्ध है। यह भी सामने आया कि पर्याप्त समय उपलब्ध होने के बावजूद जेम पोर्टल का उपयोग नहीं किया गया।
मैनपुरी के डीएफओ संजय कुमार मल्ल
जांच के दौरान डीएफओ संजय कुमार मल्ल ने तर्क दिया कि उस समय जेम पोर्टल तकनीकी खामी के चलते कार्यरत नहीं था। हालांकि, जांच टीम उनके इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुई। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि अपुष्ट नोट शीट तैयार करना और ऑनलाइन प्रक्रिया को नजरअंदाज करना गंभीर विभागीय लापरवाही है।
विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद वन विभाग की संयुक्त सचिव नीरजा सक्सेना ने डीएफओ संजय कुमार मल्ल को जिले से हटाने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही नोट शीट में गड़बड़ी के आरोप में लेखा शाखा के लिपिक अमित कुमार को निलंबित कर दिया गया।
शासन ने 2003 बैच के आईएफएस अधिकारी शिवम मिश्रा को जिले का नया डीएफओ नियुक्त किया है। संभावना जताई जा रही है कि वह मंगलवार को कार्यभार ग्रहण करेंगे। डीएफओ के हटने और लिपिक के निलंबन के बाद विभाग में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।
आगरा मंडल के वन संरक्षक डॉक्टर अनिल कुमार पटेल ने बताया कि उच्चाधिकारियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करेगा।