हरदोई से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां खुद को ग्राम विकास अधिकारी बताने वाला आरोपी गिरफ्तार हो गया है। पूरी खबर के लिए पढ़ें डाइनामाइट न्यूज़

फर्जी ग्राम विकास अधिकारी गिरफ्तार (सोर्स- इेंटरनेट)
हरदोई: उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद में इस समय फर्जी ग्राम विकास अधिकारी की झूठी कहानी सर्खियों में बनी हुई है। हर तरफ इस घटना की चर्चा हो रही है और पूरे जिले में हड़कंप मचा हुआ है। बेहटा गोकुल थाना क्षेत्र के सिधौली गांव निवासी सनोज कुमार ने खुद को फर्जी ग्राम विकास अधिकारी बताकर परिवार को कई महीनों तक गुमराह किया।
सनोज कुमार को भेजा जेल
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता को मिली जानकारी के अनुसार, अब पुलिस ने इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और सनोज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मामले को लेकर सीओ अनुज मिश्रा ने बताया कि सनोज के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज और जालसाजी के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया।
बता दें कि पुलिस ने इस दौरान सनोज कुमार के पिता, चार भाइयों और चाचा के खिलाम एफआईआर दर्ज की है। पूछताछ में युवक ने बताया कि यू-ट्यूब से सीखकर फर्जी नियुक्ति पत्र बनाया था।
ये है पूरा मामला
हरदोई में सनोज कुमार 18 घंटे तक रहा, जिसके चलते परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। खुद को ग्राम विकास अधिकारी बताने वाला सनोज कुमार शुक्रवार को ड्यूटी पर जाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटा। अगले दिन वह शाहाबाद क्षेत्र के दाउदनगर के पास एक खेत में बेहोशी की हालत में मिला।
सनोज कुमार राठौर खुद को ग्राम विकास अधिकारी बताता था। तैनाती शाहजहांपुर में होने की जानकारी परिजनों को दी थी। पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन के आधार पर उसे खोज निकाला। उसको मेडिकल कॉलेज हरदोई लाया गया। मेडिकल में वह स्वस्थ मिला और शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले।
पुलिस जांच में हुआ बड़ा खुलासा
पुलिस ने पड़ताल की तो पता चला कि सनोज शनिवार को शाहजहांपुर गया ही नहीं। वह लखनऊ में था और एक महिला से उसकी मुलाकात हुई थी। इसी बीच अधिकारियों ने उसके तैनाती जनपद शाहजहांपुर में संपर्क किया तो पता चला कि सनोज नाम का कोई कर्मचारी वहां तैनात नहीं है।
सनोज ने नवंबर 2024 में ग्राम विकास अधिकारी के पद पर नौकरी लग जाने की बात परिजनों को बताई थी। तब उसने बताया था कि तिलहर विकास खंड में उसे तैनाती दी गई है। तब से वह रोज ट्रेन से शाहजहांपुर जाता था। आमतौर पर बरेली बनारस एक्सप्रेस ट्रेन से वह वापस आता था। परिजनों को भी शनिवार को ही पता चला कि वह ग्राम विकास अधिकारी नहीं है। परिजन भी हतप्रभ हैं। इस सबके बीच पुलिस को उसका फर्जी नियुक्ति पत्र भी मिला है।