ग्रेटर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत अब एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही की कहानी बन चुकी है। चश्मदीद मनिंदर ने रेस्क्यू में देरी, टूटी दीवार और प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

इंजीनियर
Noida: नोएडा की वह रात अब सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं रही। यह रात अब सवालों की चीख बन चुकी है। सवाल सिस्टम से हैं, सवाल जिम्मेदार अफसरों से हैं और सवाल उस इंतजार से हैं, जिसने एक होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर को मौत के हवाले कर दिया। इस कहानी में एक चश्मदीद है, जिसने मौत को बेहद करीब से देखा, उसे रोकने की कोशिश की और अब सच बोलने की कीमत चुकाने का डर झेल रहा है। यह कहानी है मनिंदर की, जिसने युवराज को बचाने के लिए जान जोखिम में डालकर नाले में उतरने की हिम्मत की।
धुंध, टूटी दीवार और मौत का गड्ढा
घटना 16 तारीख की रात करीब 12 बजे की है। युवराज गुरुग्राम में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और ड्यूटी खत्म कर नोएडा लौट रहे थे। उस रात धुंध इतनी घनी थी कि सड़क और गड्ढे का फर्क ही मिट गया था। मनिंदर के मुताबिक युवराज की गाड़ी ओवरस्पीड में नहीं थी। नॉर्मल स्पीड, करीब 50 या 60 रही होगी। लेकिन सड़क किनारे बनी दीवार, जो करीब 15 दिन पहले ट्रक की टक्कर से टूट चुकी थी, बिना किसी बैरिकेड और चेतावनी के उसी हालत में पड़ी थी। युवराज की कार उसी टूटी दीवार से सीधे नाले में जा गिरी।
डेढ़ से दो घंटे जिंदा था युवराज
यह हादसा पलभर में खत्म नहीं हुआ। मनिंदर बताते हैं कि युवराज कम से कम डेढ़ से दो घंटे तक जिंदा था। नाले से “हेल्प… हेल्प…” की आवाजें आ रही थीं। युवराज ने कार से बाहर निकलकर ऊपर बैठने की कोशिश की, मोबाइल की टॉर्च जलाई ताकि कोई देख सके। यह वही वक्त था, जब समय पर रेस्क्यू होता तो एक जिंदगी बच सकती थी।
फ्लिपकार्ट डिलीवरी से लौटते वक्त दिखा मौत का मंजर
मनिंदर फ्लिपकार्ट ग्रोसरी डिलीवरी से जुड़े हैं। आखिरी ऑर्डर पूरा कर लौटते वक्त उन्होंने वहां हलचल देखी। मौके पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF मौजूद थे, संसाधन भी थे, लेकिन कोई नाले में उतरने को तैयार नहीं था। जोखिम का हवाला दिया जा रहा था। मनिंदर ने सवाल उठाया कि क्या डर की वजह से किसी को मरने के लिए छोड़ दिया जाए?
30 से 40 मिनट तक मौत से लड़ाई
कमर में रस्सा बांधकर मनिंदर खुद नाले में उतरे। अंधेरा, ठंडा पानी और झाड़ियां, हर कदम खतरे से भरा था। 30 से 40 मिनट तक उन्होंने युवराज तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। SDRF टीम सुबह करीब साढ़े चार बजे पहुंची। JCB से पुल बनाकर नाव उतारी गई, लेकिन युवराज को नहीं बचाया जा सका। सुबह सात–आठ बजे शव बाहर निकाला गया।
सच बोलने की कीमत और डर
मनिंदर सीधे तौर पर नोएडा अथॉरिटी को जिम्मेदार ठहराते हैं। उनका कहना है कि इतना खतरनाक नाला रोड लेवल पर खुला क्यों छोड़ा गया। हादसे के बाद मीडिया में सच बोलने पर उन्हें थाने बुलाया गया और पांच घंटे बैठाया गया। अब उन्हें डर है कि सच बोलने की कीमत उन्हें अपनी जान देकर न चुकानी पड़े।