करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद देवरिया जनपद के बरहज तहसील क्षेत्र में सरयू नदी पर बन रहा स्वर्गीय बाबू मोहन सिंह सेतु एक दशक बाद भी अधूरा पड़ा है। पुल का निर्माण तो लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन एप्रोच रोड न बनने के कारण आज तक आवागमन शुरू नहीं हो सका।

स्वर्गीय बाबू मोहन सिंह सेतु एक दशक बाद भी अधूरा पड़ा
Deoria: करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद देवरिया जनपद के बरहज तहसील क्षेत्र में सरयू नदी पर बन रहा स्वर्गीय बाबू मोहन सिंह सेतु एक दशक बाद भी अधूरा पड़ा है। पुल का निर्माण तो लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन एप्रोच रोड न बनने के कारण आज तक आवागमन शुरू नहीं हो सका। इसका सीधा असर देवरिया और गोरखपुर के बीच की दूरी और लोगों की दैनिक आवाजाही पर पड़ रहा है।
इस सेतु का निर्माण कार्य पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से जारी है। उद्देश्य था कि देवरिया को मऊ जनपद से सीधे जोड़ा जाए, जिससे लोगों को कम समय में दूरी तय करने की सुविधा मिले। लेकिन कार्य की रफ्तार इतनी धीमी रही कि आज भी यह पुल अर्द्धनिर्मित अवस्था में खड़ा है।
अखिलेश यादव ने SIR को लेकर BJP और चुनाव आयोग को घेरा, कहा- गड़बड़ी की आशंका हुई सच
डाइनामाइट न्यूज़ की टीम ने बरहज तहसील के गौरा से लेकर देवार क्षेत्र तक जाकर जब जमीनी हकीकत जानी, तो ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। देवार क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग आज भी सरयू नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। रोजमर्रा की जरूरतों, इलाज, पढ़ाई और प्रशासनिक कार्यों के लिए नदी पार करना ग्रामीणों के लिए एक बड़ी समस्या बना हुआ है।
बरहज बाजार को देवरिया जनपद का एक प्रमुख और ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्र माना जाता है। पहले नाव ही व्यापार का मुख्य साधन हुआ करती थी और दूर-दराज से व्यापारी सरयू नदी के रास्ते बरहज आते थे। आज भी बड़ी संख्या में लोग बरहज बाजार आते हैं, लेकिन पुल न होने के कारण देवार क्षेत्र के ग्रामीणों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। मुकदमे, पुलिस, तहसील, फौजदारी और राजस्व से जुड़े मामलों के लिए लोगों को बरहज और देवरिया मुख्यालय जाना पड़ता है। कई बार नदी पार करने में ही 2 से 3 घंटे लग जाते हैं।
Deoria: करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद देवरिया जनपद के बरहज तहसील क्षेत्र में सरयू नदी पर बन रहा स्वर्गीय बाबू मोहन सिंह सेतु एक दशक बाद भी अधूरा पड़ा है।#UPNews #DeoriaNews pic.twitter.com/ewZUm1FG2d
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) January 10, 2026
इस पुल का नामकरण देवरिया संसदीय क्षेत्र के पूर्व सांसद और समाजवादी चिंतक स्वर्गीय बाबू मोहन सिंह के नाम पर समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान वर्ष 2012 से 2017 के बीच किया गया था। उम्मीद थी कि पुल बनते ही क्षेत्र की तस्वीर बदल जाएगी, लेकिन पिछले दस वर्षों में निर्माण कार्य की सुस्ती ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एप्रोच रोड जल्द नहीं बनी, तो पुल का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से जल्द से जल्द निर्माण पूरा कर आवागमन बहाल करने की मांग की है।