कोडीन कफ सिरप तस्करी में मुख्य आरोपित शुभम जायसवाल के भाई की गिरफ्तारी से नए खुलासे हुए हैं। 10 करोड़ की काली कमाई, वायरल सपा समर्थक पोस्ट और अखिलेश यादव के सवालों ने इस केस को अब राजनीतिक रंग दे दिया है।

कोडीन कफ सिरप तस्करी मामले में बढ़ी कार्रवाई (Img- Internet)
Varanasi: कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी मामले में पुलिस ने एक और अहम कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित शुभम जायसवाल के भाई आदित्य जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है। शुभम और आदित्य रिश्ते में मौसेरे भाई बताए जा रहे हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कफ सिरप की तस्करी से अर्जित काली कमाई में से करीब 10 करोड़ रुपये आदित्य जायसवाल ने अलग-अलग माध्यमों से खपाए थे। इस गिरफ्तारी के बाद न सिर्फ तस्करी नेटवर्क की परतें खुल रही हैं, बल्कि मामला अब राजनीतिक बहस का रूप भी लेता जा रहा है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आदित्य जायसवाल लंबे समय से जांच एजेंसियों की रडार पर था। पूछताछ और वित्तीय लेन-देन की जांच में यह सामने आया कि कोडीन कफ सिरप की अवैध बिक्री से हुई भारी कमाई को छिपाने और निवेश करने में आदित्य की अहम भूमिका थी। बताया जा रहा है कि करीब 10 करोड़ रुपये की राशि को उसने अलग-अलग खातों, संपत्तियों और कारोबार में खपाया। पुलिस अब इस पैसे के नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुट गई है।
इस पूरे कफ सिरप तस्करी कांड का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल बताया जा रहा है। पहले ही उसकी गिरफ्तारी और नेटवर्क को लेकर कई खुलासे हो चुके हैं। अब उसके भाई की गिरफ्तारी से यह साफ हो रहा है कि तस्करी का यह कारोबार संगठित तरीके से परिवार और करीबी लोगों की मदद से चलाया जा रहा था। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस रैकेट के तार कई राज्यों तक फैले हुए हैं।
कफ सिरप कांड: शुभम जायसवाल ने कमाए 800 करोड़, हर बोतल पर लेता था इतना प्रॉफिट
इसी बीच इस कफ सिरप कांड में एक नया राजनीतिक एंगल सामने आया है। मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर की गई कुछ पुरानी पोस्ट वायरल हो गई हैं। इन पोस्ट में शुभम समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थन में दुआ करता नजर आ रहा है। एक पोस्ट में उसने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से अकेले चुनाव लड़ने की गुजारिश की थी और सपा की सरकार बनने का दावा भी किया था। इन वायरल पोस्टों के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
कफ सिरप तस्करी मामले की जांच को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों पर सवाल खड़े किए हैं। शनिवार को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कोडीन युक्त कफ सिरप रैकेट में शामिल लोगों ने करीब 800 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा कर ली है, लेकिन न तो प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और न ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इस मामले की जांच कर रही है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज (Img- Internet)
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि ईडी की छापेमारी और कार्रवाई केवल उन्हीं राज्यों में की जाती है जहां चुनाव हो रहे होते हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि कफ सिरप तस्करी इतना बड़ा अपराध है, तो इसकी जांच किसी केंद्रीय एजेंसी से क्यों नहीं कराई जा रही। उनका कहना था कि सरकार जांच एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है।
कोडीन आधारित कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी दलों, खासतौर से सपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भाजपा जहां इस मामले में कानून-व्यवस्था और सख्त कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं सपा इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है। दोनों दलों के बयानों से साफ है कि आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
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आदित्य जायसवाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और अन्य एजेंसियां अब कफ सिरप तस्करी से जुड़े पूरे नेटवर्क, राजनीतिक संबंधों और पैसों के लेन-देन की गहन जांच में जुट गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।