राजपुर नगर पंचायत में गुरुवार को उस समय अव्यवस्था का नजारा देखने को मिला, जब उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आगमन पर आयोजित भव्य कंबल वितरण कार्यक्रम अफरा-तफरी में तब्दील हो गया।

डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में भगदड़
Kanpur Dehat: जनपद कानपुर देहात के राजपुर नगर पंचायत में गुरुवार को उस समय अव्यवस्था का नजारा देखने को मिला, जब उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आगमन पर आयोजित भव्य कंबल वितरण कार्यक्रम अफरा-तफरी में तब्दील हो गया। ठंड से राहत देने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में दो हजार गर्म कंबलों के वितरण की योजना थी, लेकिन अव्यवस्थित इंतजामों के चलते हालात बेकाबू हो गए।
कार्यक्रम स्थल पर जैसे ही कंबल और लंच पैकेट वितरण की प्रक्रिया शुरू हुई, वैसे ही लाभार्थियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कंबलों की संख्या सीमित होने और वितरण की स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण लोगों में छीना-झपटी शुरू हो गई। देखते ही देखते भगदड़ जैसी स्थिति बन गई, जिसमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान नजर आए। कई लोग कंबल पाने की कोशिश में गिरते-पड़ते दिखे, जबकि कुछ खाली हाथ लौटने को मजबूर हो गए।
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इसी दौरान लंच पैकेट वितरण का भी बेहद शर्मनाक दृश्य सामने आया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लंच पैकेट को सम्मानजनक तरीके से देने के बजाय जमीन पर फेंककर बांटा गया। लोग जमीन से पैकेट उठाते दिखाई दिए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन और आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह गरीब और जरूरतमंद लोग एक पैकेट और एक कंबल के लिए आपस में संघर्ष करते नजर आ रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान मंच से विकास और जनकल्याण की योजनाओं के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन मंच के नीचे की हकीकत इन दावों के बिल्कुल उलट दिखी। जहां एक ओर मंच पर जनप्रतिनिधि सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे, वहीं नीचे गरीब और असहाय लोग एक कंबल के लिए जूझते नजर आए।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रम के समापन के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और कंबल व लंच पैकेट वितरण में भारी अव्यवस्था बनी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन और नगर पंचायत द्वारा पहले से बेहतर योजना और नियंत्रण किया जाता, तो ऐसी शर्मनाक स्थिति से बचा जा सकता था। फिलहाल, वायरल वीडियो के बाद कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं और प्रशासन की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।