आजमगढ़ के नामी अस्पताल में आखिर कैसे बदल गया नवजात? बेटे की जगह बेटी सौंपी

आजमगढ़ के चर्चित रेनबो चिल्ड्रेन अस्पताल में नवजात शिशु बदलने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के कर्मचारियों, प्रबंधन से जुड़े लोगों और दूसरे दंपती समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 27 July 2026, 2:26 PM IST

Azamgarh : जिले के चर्चित रेनबो चिल्ड्रेन अस्पताल में नवजात शिशु बदलने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। जिस घटना ने पहले परिवार को सदमे में डाल दिया था और बाद में सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी थीं, उसी मामले में अब मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय की ओर से सिधारी थाने में तहरीर देकर छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोप अस्पताल के कर्मचारियों, प्रबंधन से जुड़े लोगों और दूसरे दंपती पर लगे हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुट गई है।

बेटे की जगह बच्ची मिलने पर परिवार ने लगाया गंभीर आरोप

पुरानी कोतवाली क्षेत्र के आसिफगंज निवासी कमलेश वर्मा ने 4 जून को जिलाधिकारी से शिकायत करते हुए बताया था कि उनकी पत्नी नेहा सोनी ने 12 मई को बलिया जिला महिला अस्पताल में एक पुत्र को जन्म दिया था। जन्म के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए तिवारीपुर स्थित रेनबो चिल्ड्रेन अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोप है कि 27 मई को अस्पताल प्रबंधन ने उनके बेटे की जगह एक नवजात बच्ची उन्हें सौंप दी। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने उन्हें चुप रहने और जेल भेजने तक की धमकी दी।

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सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद लौटा असली बच्चा

शिकायत में यह भी कहा गया कि मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधक डॉ. दीपक कुमार पांडेय अपने स्टाफ के साथ कंचनपुर गांव पहुंचे। वहां से शिकायतकर्ता का वास्तविक नवजात पुत्र वापस दिलाया गया। इसके बाद बच्चे को दोबारा अस्पताल में भर्ती कर उसका इलाज कराया गया और 28 मई को डिस्चार्ज कर दिया गया। कमलेश वर्मा ने आरोप लगाया कि उनके पुत्र को बेचने की कोशिश की गई और पूरे मामले को दबाने के लिए उन्हें धमकाया भी गया।

जांच में सामने आई टैग बदलने की कहानी

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी सदर, क्षेत्राधिकारी नगर और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने 10 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंपी। जांच में सामने आया कि अस्पताल में भर्ती दोनों नवजात शिशुओं के पहचान टैग खराब हो गए थे। इसके बाद नए टैग लगाने के दौरान हुई गलती की वजह से दोनों बच्चों की पहचान बदल गई। रिपोर्ट के अनुसार स्टाफ नर्स नीतू यादव ने अपने बयान में स्वीकार किया कि मालिश के दौरान टैग खराब हो गए थे और नए टैग लगाने में त्रुटि हो गई।

दूसरे दंपती की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में दूसरे दंपती की भूमिका को भी संदेहास्पद बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक माधवी यादव ने अस्पताल में पहले ही शिकायत की थी कि उसने पुत्री को जन्म दिया था, जबकि उसे पुत्र सौंपा गया है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। बाद में 17 मई को रासेपुर स्थित एक निजी नर्सिंग होम में जांच के दौरान भी यह पुष्टि हुई कि उसके यहां पुत्री का जन्म हुआ था, लेकिन इसके बावजूद वह और उसके पति कन्हैया यादव नवजात लड़के को अपने साथ लेकर चले गए।

छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज, पुलिस ने शुरू की जांच

जांच रिपोर्ट के आधार पर उप मुख्य चिकित्साधिकारी एवं नोडल अधिकारी डॉ. आलेन्द्र कुमार की तहरीर पर सिधारी थाने में स्टाफ नर्स नीतू यादव, अनरजीत चौहान, जयकृष्ण शुक्ल, शशि कुमार पांडेय, माधवी यादव और कन्हैया यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

Location :  Azamgarh

Published :  27 July 2026, 2:26 PM IST