जिला अस्पताल जाने की बजाय निजी क्लीनिक पहुंची प्रसूता, फिर हो गई मौत! आशा वर्कर और महिला डॉक्टर पर गंभीर आरोप

बदायूं के सहसवान में प्रसव के दौरान महिला की मौत के बाद परिवार ने क्लीनिक की महिला डॉक्टर और आशा वर्कर पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। पति ने प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई मांगी। शिकायत में सीएचसी से जिला अस्पताल भेजने की सलाह और क्लीनिक में इलाज पर सवाल उठाए गए हैं। प्रशासन दो अस्पताल सील कर चुका है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 23 October 2026, 6:28 PM IST

Budaun: उत्तर प्रदेश में बदायूं के सहसवान तहसील क्षेत्र में प्रसव के दौरान गर्भवती महिला की मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने मोहल्ला सैफुल्लागंज स्थित निजी क्लीनिक की महिला डॉक्टर और आशा वर्कर पर आरोप लगाए हैं। पति छोटे पुत्र ओम प्रकाश ने प्रार्थना पत्र देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सीएचसी से जिला अस्पताल ले जाने की सलाह

प्रार्थना पत्र के मुताबिक, मोहल्ला मोहिउद्दीनपुर निवासी छोटे अपनी गर्भवती पत्नी को आशा वर्कर के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), सहसवान ले गए थे। पति का आरोप है कि वहां डॉक्टरों ने महिला की हालत देखकर उसे जिला अस्पताल, बदायूं ले जाने की सलाह दी। आरोप है कि आशा वर्कर उन्हें वहां ले जाने के बजाय मोहल्ला सैफुल्लागंज स्थित निजी क्लीनिक ले गई।

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छोटे के मुताबिक, क्लीनिक में महिला डॉक्टर ने जांच किए बिना बोतल और इंजेक्शन लगाए। कुछ देर बाद प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी। पति का कहना है कि उन्होंने डॉक्टर से कहा कि यदि इलाज संभव नहीं है तो उन्हें दूसरी जगह जाने दिया जाए। आरोप है कि डॉक्टर सामान्य प्रसव होने की बात कहकर उन्हें रोकती रही। हालत नाजुक होने पर कथित तौर पर डॉक्टर ने जवाब दे दिया और महिला की मौत हो गई।

पति ने अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की

महिला की मौत के बाद परिवार ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि सीएचसी में क्या सलाह दी गई, महिला को निजी क्लीनिक क्यों ले जाया गया और वहां इलाज के दौरान किन प्रक्रियाओं का पालन हुआ। आशा वर्कर, क्लीनिक संचालक और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों को शिकायतकर्ता के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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अस्पतालों पर कार्रवाई के बावजूद सवाल

सहसवान में कथित अवैध अस्पतालों को लेकर चिंता जताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जॉइंट मजिस्ट्रेट शौर्य अरोड़ा के नेतृत्व में प्रशासन ने हाल ही में स्टार हेल्थ केयर और भारत हेल्थ केयर सेंटर समेत दो अस्पताल सील किए थे। कई अन्य केंद्रों को नोटिस दिए गए थे।

इस मामले ने प्रसूता की सुरक्षा और निजी क्लीनिकों की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्षों के बयान और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई से ही जल्द पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Location :  Budaun

Published :  23 October 2026, 6:28 PM IST