उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने सीतापुर में बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतर्राज्यीय वन्य जीव तस्करी गिरोह के एक सदस्य को 803 रोजरिंग प्रजाति के तोतों के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपी कई राज्यों में प्रतिबंधित पक्षियों की सप्लाई करता था। मामले में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

आरोपी (फाइल फोटो)
Sitapur: सीतापुर से एक एक बड़ा खुलासा हुआ, जब स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने वन्य जीव तस्करी के बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए एक तस्कर को धर दबोचा। आरोपी के पास से 803 रोजरिंग प्रजाति के तोते बरामद हुए, जिन्हें बेरहमी से पिंजरों और झोलों में ठूंसकर दूसरे राज्यों में बेचने की तैयारी थी। इस कार्रवाई ने एक बार फिर वन्य जीव तस्करी के काले धंधे की सच्चाई उजागर कर दी है।
एसटीएफ को इनपुट मिला था कि अंतर्राज्यीय गिरोह का एक सदस्य बड़ी संख्या में प्रतिबंधित पक्षियों की तस्करी करने वाला है। इसके बाद अपर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में टीम को एक्टिव किया गया। 28 मार्च को उपनिरीक्षक फैजूद्दीन सिद्दीकी के नेतृत्व में टीम सीतापुर में जांच कर रही थी, तभी सूचना मिली कि एक तस्कर दिल्ली जाने की फिराक में है।
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सूचना मिलते ही एसटीएफ ने वन विभाग और वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की टीम के साथ मिलकर खैराबाद थाना क्षेत्र के शांतिनगर काजियारा में जाल बिछाया। मुखबिर की निशानदेही पर आरोपी शिवम को गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान 8 पिंजरों और 7 झोलों में ठूंसकर रखे गए 803 तोते बरामद हुए, जिनकी हालत बेहद खराब थी।
गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह लंबे समय से इस धंधे में शामिल है। पहले सामान्य पक्षियों का व्यापार करता था, लेकिन कम मुनाफे के चलते उसने प्रतिबंधित प्रजातियों की तस्करी शुरू कर दी। उसने खुलासा किया कि लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और रामपुर के जंगलों से पक्षियों को पकड़कर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में ऊंचे दामों पर बेचा जाता था।
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पुलिस ने आरोपी के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले में अन्य तस्करों की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि वन्य जीवों की तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।