Balrampur Politics: सपा नेता Bhanu Tiwari ने ठोकी दावेदारी, तुलसीपुर सीट पर सियासी भूचाल
तुलसीपुर विधानसभा की राजनीति में भानू तिवारी का चुनावी ऐलान एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। उनके इस कदम से न केवल समाजवादी पार्टी के भीतर उत्साह है, बल्कि जिले के सियासी समीकरणों में भी हलचल तेज हो गई है।
Balrampur: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही तराई की राजनीति में भारी उलटफेर के संकेत मिलने लगे हैं। जनपद की हॉट सीट मानी जाने वाली तुलसीपुर विधानसभा में उस वक्त सियासी उबाल आ गया, जब समाजवादी पार्टी के कद्दावर और निष्ठावान नेता भानू तिवारी ने चुनावी मैदान में उतरने का औपचारिक ऐलान कर दिया। तिवारी की इस घोषणा ने न केवल विपक्षी खेमों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि पार्टी के भीतर भी टिकट के समीकरणों को नए सिरे से लिखने पर मजबूर कर दिया है।
भानू तिवारी की पहचान महज़ एक नेता की नहीं, बल्कि संघर्षों से उपजे एक व्यक्तित्व की है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति की नर्सरी से की थी। छात्र संघ अध्यक्ष के रूप में युवाओं की आवाज़ बुलंद करने वाले तिवारी ने शुरू से ही समाजवादी विचारधारा का दामन थामे रखा। जिला पंचायत सदस्य के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में पैठ बनाने के बाद पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए एमएलसी चुनाव में भी अपना प्रत्याशी बनाया था।
तुलसीपुर सीट पर मचा घमासान
तुलसीपुर के स्थानीय कार्यकर्ताओं का मानना है कि भानू तिवारी का मैदान में उतरना उन पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के लिए संजीवनी जैसा है, जो लंबे समय से खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे थे। एक प्रखर समाजसेवी के रूप में उनकी सक्रियता ने उन्हें जनता के बीच 'सुख-दुख का साथी' बना दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तिवारी की दावेदारी से सपा के कोर वोट बैंक के साथ-साथ सवर्ण और युवा मतदाताओं में भी सेंधमारी की संभावना बढ़ गई है।
मीडिया से रूबरू होते हुए भानू तिवारी ने साफ कहा, मेरा उद्देश्य चुनाव लड़ना मात्र नहीं, बल्कि तुलसीपुर का सर्वांगीण विकास करना है। छात्र जीवन से आज तक मैं जनता के बीच रहा हूँ। आज क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ताओं की पुकार है कि मैं उनके सम्मान की लड़ाई लड़ूँ। पार्टी नेतृत्व जो भी जिम्मेदारी देगा, उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।
राजनीतिक पंडितों की मानें तो भानू तिवारी का अनुभव और उनकी बेदाग छवि अन्य दलों के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकती है। बलरामपुर जिले की यह सीट हमेशा से जातीय और विकास के मुद्दों के बीच झूलती रही है, ऐसे में एक 'लोकल और एक्सेसिबल' चेहरा समीकरणों को पूरी तरह पलट सकता है।