आजमगढ़ के मदरसे में नेपाली शिक्षक की नियुक्ति पर विवाद, जांच रिपोर्ट पहुंची शासन के पास

आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम में नेपाली नागरिक मोहम्मद रजा की 2016 में हुई शिक्षक नियुक्ति को लेकर विवाद है। शिकायत के बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अब नियुक्ति से जुड़े मामले में अंतिम फैसला शासन को लेना है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 September 2026, 8:01 AM IST

Azamgarh: आजमगढ़ के मुबारकपुर स्थित मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम में नेपाली नागरिक की शिक्षक पद पर नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। मामले में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब इस मामले में अंतिम निर्णय शासन स्तर से लिया जाना है।

2016 की नियुक्ति को लेकर उठे सवाल

मुबारकपुर निवासी मुहम्मद अरबी ने 16 जनवरी को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर मदरसे में मौलवी मोहम्मद रजा की वर्ष 2016 में हुई नियुक्ति पर सवाल उठाए थे। शिकायतकर्ता का आरोप था कि मोहम्मद रजा मूल रूप से नेपाल के धनुसा जिले के रहने वाले हैं और उनकी विदेशी नागरिकता की जानकारी छिपाकर उन्हें सरकारी लाभ दिलाया गया।

शिकायत के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वर्षा अग्रवाल ने मामले की जांच शुरू की। मदरसा प्रबंधन ने 31 जनवरी को अपना स्पष्टीकरण और संबंधित अभिलेख जांच अधिकारी के सामने प्रस्तुत किए।

प्रबंधन ने भारत-नेपाल संधि का दिया हवाला

जांच के दौरान मदरसा प्रबंधन ने स्वीकार किया कि मोहम्मद रजा नेपाल के नागरिक हैं। प्रबंधन की ओर से दावा किया गया कि उनकी नियुक्ति भारत-नेपाल मैत्री संधि 1950 के प्रावधानों के तहत की गई थी। प्रबंधन का कहना था कि इस व्यवस्था के तहत नेपाली नागरिक भारत में बिना वीजा के काम कर सकते हैं।

हालांकि, शिकायतकर्ता ने प्रबंधन के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाते हुए उसमें कई विसंगतियां होने का आरोप लगाया। इसी वजह से नियुक्ति की वैधता और सरकारी लाभ से जुड़े पहलुओं की जांच की गई।

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पहले भी निलंबित हो चुकी है मदरसे की मान्यता

मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम इससे पहले भी एक विदेशी नागरिक से जुड़े मामले को लेकर विवादों में रहा है। ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर चुके मौलाना शमसुल हुदा को शिक्षण कार्य दिए जाने के मामले में मदरसे की मान्यता निलंबित की जा चुकी है। इस मामले में मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से कार्रवाई की गई थी।

सरकार से अनुदानित इस मदरसे को 28 सितंबर 1948 को स्थायी मान्यता मिली थी। पुराने विवाद के बाद अब नेपाली शिक्षक की नियुक्ति को लेकर नया मामला सामने आया है।

शासन के फैसले पर टिकी निगाहें

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वर्षा अग्रवाल ने बताया कि मामले की जांच कर पूरी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अब इस पर निर्णय शासन स्तर से लिया जाना है। शासन की ओर से जो भी निर्देश प्राप्त होगा, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल जांच रिपोर्ट शासन तक पहुंचने के बाद सभी की नजर अब इस बात पर है कि नेपाली नागरिक की नियुक्ति को लेकर शासन क्या निर्णय लेता है।

Location :  Azamgarh

Published :  17 September 2026, 8:01 AM IST